जेनरिक शॉप्स का सच: कागजों में 10 शॉप्स खुली है लेकिन जाँच पड़ताल में मिलीं सिर्फ 4 दुकानें ही खुली है


लखनऊ. यूपी के लखनऊ में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र (जेनरिक ड्रग स्टोर) सिर्फ कागजों पर खुले हैं। फाइलों में जेनरिक ड्रग की बिक्री के लिए कुल 10 ड्रग स्टोर दिखाए गए हैं, जिनमें से केवल चार ही चल रहे हैं। बाकी 6 सिर्फ कागजों में हैं। जब जेनरिक ड्रग स्टोर की पड़ताल की तो यह बात सामने आई।
इन दो केस से समझें जेनरिक दवाओं का हाल…
#केस नंबर 1: बाराबंकी निवासी राजू कुशवाहा की मां पूनम देवी (54 वर्ष) को ब्रेस्ट कैंसर है। डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल में राजू ने उन्हें 28 अप्रैल को ऑन्कोलॉजी विभाग में दिखाया था। डॉ ने सरकार के आदेशानुसार जेनरिक दवाएं तो लिखीं, लेकिन राजू को वह दवा खोजने में घंटो लग गए। उन्होंने अस्पताल के बाहर और हजरतगंज के चक्कर लगाए लेकिन उन्हें दवा नहीं मिली. बाद में पता चला कि अमीनाबाद के गणेशगंज में जेनरिक दवा की दूकान है। इस दौड़ भाग में उनके लगभग 100 रुपए खर्च हो गए। साथ ही 20 किमी का रास्ता तय करना पड़ा।
#केस नंबर 2: डालीबाग निवासी संजय गुप्ता को ज्वाइंडिस है। 28 अप्रैल को हजरतगंज के सिविल हॉस्पिटल की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने जेनरिक दवाएं लिख दी। वे पर्चा लेकर हॉस्पिटल के बाहर मेडिकल स्टोर पर दवा लेने के लिए पहुंचे। मेडिकल स्टोर पर उन्हें पता चला कि ये दवाएं चुनिंदा जगहों पर ही मिल पाएंगी। इसके बाद संजय ने करीब 20 किमी. से अधिक की दूरी तय करने के बाद इंदिरा नगर स्थित जन औषधि केंद्र से दवा ली।
10 में से 6 दुकानें कागजों पर
– बता दें, एफएसडीए की फाइलों में शहर में कुल दस स्थानों पर जेनरिक ड्रग स्टोर संचालित होते दिखाया गया है। लेकिन इनमें से केवल 4 दुकानें ही अपने दिए पते पर संचालित होते पाई गईं।
– इंदिरानगर, गोमतीनगर, गणेशगंज और गुडंबा में तो दुकान मिली, लेकिन राजाजीपुरम, चिनहट, बुद्धेश्वर विहार, सरोजनीनगर, गोसाईंगंज और राजेंद्र नगर में दुकाने नहीं मिली।
– इसकी वजह से मरीजों को जेनरिक दवाएं खरीदने के लिए 20 से 30 किमी की दूरी तय करनी पड़ रही है।
– गौरतलब है कि, लखनऊ की आबादी 40 लाख की है। उस हिसाब से सिर्फ 4 दुकानें काफी कम हैं।
ड्रग इंस्पेक्टर के पास नहीं थे इन पांच सवालों के ठोस जवाब
1. ड्रग इंस्पेक्टर संजय यादव से पूछा गया कि जब विभाग की फाइलों में दस जेनरिक ड्रग स्टोर के नाम और पते दर्ज है तो केवल चार ही अपने पते पर क्यों मिले, बाकी के कहां चले गये?
2. नियम के मुताबिक जेनरिक ड्रग स्टोर खोलने के लिए पहले ब्यूरो ऑफ़ फार्मा पीएसयू ऑफ़ इंडिया (बीपीपीआई) का अप्रूवल लेटर मिलना जरुरी होता है। इसके बाद ही एफएसडीए ड्रग स्टोर खोलने के लिए लाइसेंस जारी करता है। फिर यहां बीपीपीआई का अप्रूवल लेटर देखना क्यों नहीं उचित समझा गया?
3. बीपीपीआई जेनरिक ड्रग स्टोर खोलने के लिए अप्रूवल देने से पहले मौके का मुआयना करती है। जांच पड़ताल के बाद ही अप्रूवल जारी किया जाता है, फिर यहां क्यों नहीं ऐसा किया गया?
4. एफएसडीए के अधिकारियों ने बीपीपीआई से आज तक इस बारे में सवाल क्यों नहीं पूछा?
5. लायसेंस जारी होने के बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने सभी दुकानों पर आज तक इंस्पेक्शन क्यों नहीं किया?

ड्रग इंस्पेक्टर ने बचाव में दिए ये जवाब
– ब्यूरो ऑफ़ फार्मा पीएसयू ऑफ़ इंडिया (बीपीपीआई) हमें जो निर्देश देता है उसके मुताबिक़ ही हम लोग काम करते हैं।
– अभी तक दस लोगों ने जेनरिक ड्रग स्टोर खोलने के लिए आवेदन किया था। उन सभी लोगों को ड्रग स्टोर खोलने के लिए लाइसेंस जारी भी कर दिया गया।
– उन्होंने अभी तक दुकानें क्यों नहीं खोली है। इस बारे में मेरे पास अभी कोई भी जानकारी नहीं है। इस मामले को कल फिर से दिखाता हूँ।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
– डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जेपी नाईक ने कहा- ”प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र (जेनरिक ड्रग स्टोर) खोलने के नाम पर केवल पैसे का खेल चल रहा है।”
– ”कुछ लोग सरकार की तरफ से मिलने वाले 2.50 लाख रुपये को हड़पने की जुगत में हैं। इसमें एफएसडीए के भी कुछ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है।”
– ”इसकी जांच होनी चाहिये। जो लोग भी इसके लिए जिम्मेदार हों उनके खिलाफ़ एक्शन लिया जाना चाहिए।”
क्या कहते हैं दुकानदार
– गणेश गंज स्थित जन औषधि केंद्र (जेनरिक ड्रग स्टोर) के प्रोपराइटर रवि तिवारी ने कहा- ”बहुत से लोगों को अभी जेनरिक दवाओं के बारे में जानकारी नहीं है। सरकार की सख्ती के बाद भी अभी आधे से अधिक डॉक्टरों ने जेनरिक दवाएं लिखना शुरू नहीं किया है।”
– ”इसलिए दुकानों पर जेनरिक दवाओं की बिक्री बहुत ही कम हो पा रही है। रोजाना 10 से 20 पेशेंट ही जेनरिक दवाएं खरीदने पहुंच रहे है।”
– ”किसी दिन 1500 से 2000 रुपए तो किसी दिन 500 से 1000 हजार रुपए की बिक्री ही हो पा रही है।”
– वहीं, विशाल खंड स्थित जन औषधि केंद्र (जेनरिक ड्रग स्टोर) के मालिक कमल चंदवानी ने कहा- ”लोगों को लगता है कि जेनरिक दवाएं सस्ती होने के कारण कम असरदार होंगी। इसलिए वे अभी भी अपने डॉक्टरों पर जेनरिक दवाएं लिखने के बजाए, ब्रांडेड दवाएं लिखने के लिए कह रहे है।”
– ”जेनरिक दवाओं के बारे में सरकार ने कोई प्रचार प्रसार भी नहीं कराया है। इसलिए रोजाना 20 से 30 पेशेंट ही जेनरिक दवाएं खरीदने के लिए पहुंचे रहे हैं।”
ढाई लाख की मिलती है सब्सिडी
– जनऔषधि के केंद्र खोलने में ढाई लाख की सब्सिडी सरकार की ओ से दी जाती है। यह सब्सिडी दूकान खोलने के बाद मिलती है।
– सरकार इन दुकानों पर सस्ती दवाएं उपलब्ध कराती है।
यूपी में डेढ़ सौ तो देश में 600 जेनरिक दवा की दुकानें
– अभी यूपी में केवल 150 जेनरिक दवा की दुकानें हैं। जबकि देश भर में सिर्फ 600 दुकानें हैं।
– वहीं, सरकार अब पूरे प्रदेश में 3 हजार जेनरिक दवाओं की दुकानें खोलने की बात कह रही है।

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