पाकिस्तान की त्रासदी के लिए भारत जिम्मेदार! फारूक अब्दुल्ला ने कहा…


नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। फारूक ने पाकिस्तान की त्रासदी के लिए भारत को समान रूप से जिम्मेदार ठहराया है। वह रविवार को (14 जनवरी) श्रीनगर में मीडिया से बात कर रहे थे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयानों को याद करते हुए भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत और पाकिस्तान के बीच सेतु का काम करने की सलाह दी है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब फारूक अब्दुल्ला ने इस तरह का बयान दिया है। इससे पहले उन्होंने सार्वजनिक तौर पर गुलाम कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा करार दिया था। फारूक केंद्र में मंत्री भी रह चुके हैं। इसके बावजूद वह विवादास्पद बयान देने से बाज नहीं आते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब सीमा पर भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार गोलीबारी की घटनाएं हो रही हैं।

फारूक ने कहा, ‘हमारा पड़ोसी सोचता है कि बांग्लादेश को अलग कर हमने पाकिस्तान को बांटा है। हमलोग बांटने वाले नहीं हैं। यह त्रासदी तो उसी देश (पाकिस्तान) में मौजूद है। यह हमारा पैदा किया हुआ नहीं है, लेकिन इस संकट से हम आज भी जूझ रहे हैं। ऐसा बिल्कुल न कहें कि हम उनके संकट में शामिल नहीं रहे हैं। जितना वे हमारी त्रासदी में शामिल हैं, उतना ही हम उनके संकट में संलिप्त हैं। यह एकतरफा नहीं है।’ एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी को याद करते हुए मौजूदा सरकार को नसीहत भी दी है। फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘मुझे पाकिस्तान में वाजपेयी द्वारा कहे गए शब्द अभी भी याद हैं। उन्होंने कहा था कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसियों को कभी नहीं बदला जा सकता है। आप पड़ोसियों के साथ शांति के साथ रहें या फिर दुश्मनी निभाते हुए एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाएं। मैं मौजूदा प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) से वही बात कहना चाहूंगा कि वह एक-दूसरे के बीच सेतु बनें।’

फारूक अब्दुल्ला ने भारत और पाकिस्तान से साथ मिलकर आतंकवाद की समस्या से लड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के बीच बैंकाक में मुलाकात हुई है। यदि आतंकवाद की समस्या है तो दोनों देशों को मिलकर इस मसले पर विचार-विमर्श करना चाहिए।’ मालूम हो कि सोमवार को सीमा पर जारी गोलीबारी में पाकिस्तान के कई जवान और आतंकी मारे गए हैं। दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर पर वार्ता होने के बावजूद गोलीबारी और घुसपैठ की समस्याएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

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