नरेश अग्रवाल के कारनामे पढ़ सर चकरा जायेगा नीचे पढ़े….


बिहार में रामविलास पासवान को विपक्षी लोग मौसम वैज्ञानिक कहते हैं तो यूपी में भी इस नेता के बारे में कहा जाता हैं कि वह डूबते नाव की नहीं करते सवारी. जी हां हम बात कर रहे हैं उस नेता कि जो अभी अभी सपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुआ है. नरेश अग्रवाल के रिकॉर्ड को देखेंगे तो आप भी यही कहेंगे. नरेश अग्रवाल के चार दशक की राजनीति कैरियर पर नजर डालेंगे तो कहेंगे कि उन्होंने कभी भी डूबते नाव की सवारी नहीं की.

लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद पहली बार नरेश 1980 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने. उसके बाद भी कई बार जीते. 1996 में कांग्रेस के टिकट पर छठीं बार विधायक बने. सबसे पहली पल्टी उन्होंने तब लिया जब बसपा ने बीजेपी से समर्थन वापस ले लिया और कल्याण सिंह की भाजपा सरकार पर संकट मंडराने लगा. तब नरेश अग्रवाल डेढ़ दर्जन विधायकों के साथ कांग्रेस पार्टी तोड़ दिए और लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी का गठन किया. बदले में उन्हें कल्याण सरकार में ऊर्जा मंत्री का पद मिला.

नरेश अग्रवाल के दबाव की राजनीति से परेशान होकर राजनाथ सिंह ने कैबिनेट से बाहर कर दिया तो मौका देख सपा का दामन थाम लिया. समाजवादी पार्टी में पांच साल की राजनीति करते नरेश अग्रवाल को लगा कि अब बसपा के दिन आने वाले है. बस फिर क्या था कि 2008 में बेटे नितिन के साथ नरेश बसपा मुखिया मायावती के साथ हो लिए.

एक बार फिर बसपा से मोहभंग हुआ और लगा इनकी दोबारा सत्ता नहीं आने वाली हैं तो फिर 2012 में विधानसभा चुनाव होने के साल भर पहले ही समाजवादी पार्टी से रिश्ता साध लिया. समाजवादी पार्टी ने राज्य सभा नहीं भेजा तो अब फिर से बीजेपी में लौट आये तो समझ लीजिये किस कला में माहिर हैं बीजेपी के नए नवेले नरेश अग्रवाल.

 

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