जानिए भय्यूजी महाराज से जुड़ी 11 खास बातें!

Know about 11 special things related to Dhayyaji Maharaj!

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उदय सिंह देशमुख उर्फ भय्यूजी महाराज की खुदकुशी की घटना से हर कोई स्तब्ध है. यूं तो भय्यूजी महाराज की पहचान कई राजनेताओं से थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इनकी नजदीकी कई बार सुर्खियां बनी. पीएम नरेंद्र मोदी जब 26 मई को प्रधानमंत्री पद की शपथ ले रहे थे तो उनके 4,000 वीआइपी मेहमानों में 46 साल के उदय सिंह देशमुख (भय्यूजी महाराज) भी तशरीफ लाए थे. आमतौर पर बाबा लोग किसी मठ-मंदिर या श्रृद्धालु के घर रुकते हैं, लेकिन भय्यूजी दक्षिण दिल्ली के एंबेसडर होटल में ठहरे और कुछ चुनिंदा लोगों से मुलाकात के बाद अगले दिन इंदौर लौट गए. आइए इस खास शख्स से जुड़ी 11 बातें जानते हैं.-:

1. साल 2011 में भय्यूजी महाराज रामलीला मैदान में अण्णा हजारे का अनशन तुड़वाने आए थे तो सबकी नजर उन पर थी.

2. जेडी(यू) अध्यक्ष शरद यादव ने लोकसभा में जब अण्णा आंदोलन पर अपनी भड़ास निकाली तो भय्यूजी को भी खूब लपेटा था. उस समय लोगों ने पहली बार एक गोरे-चिट्टे, ऊंचे-पूरे हीरो की तरह दिखने वाले शख्स को एक साधु के रूप में देखा था. यह भारतीय आध्यात्मिक जगत का बिल्कुल नया कलेवर था. तलवारबाजी और घुड़सवारी में निपुण मराठा ने तब की यूपीए सरकार के एक मंत्री के बुलावे पर अण्णा को मनाने की कोशिश की थी.

3. 28 जनवरी, 2011 को गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही भय्यूजी महाराज के संत नगरी परियोजना की घोषणा की थी. इस परियोजना में भारत के सभी धर्मों के 2,700 से ज्यादा संत-महात्माओं की मूर्तियां और इतिहास संजोया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी भारत की आध्यात्मिक विरासत से रू-ब-रू हो सके.

4. मां जीजाबाई की उंगली पकड़कर खड़े बाल शिवाजी के चित्र और भगवान गणेश के सुंदर विग्रहों से सजी इंदौर की अपनी बैठक में ‘संत नगरी’ के बारे में साइंस ग्रेजुएट संत ने कहा, ‘यहां भारत के सभी धर्मों के गुरुओं की मूर्तियां और विचार उद्धृत किए जाएंगे.’ दरअसल उन्होंने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को संत नगरी का प्रस्ताव भेजा था, जिसे उन्होंने हाथोंहाथ स्वीकार कर लिया.

5. 2011 में मोदी जब अहमदाबाद में सद्भावना उपवास पर बैठे थे—यह उपवास उस समय विवाद में आ गया था जब मोदी ने मुस्लिम टोपी पहनने से मना कर दिया था—उस वक्त दूसरे संतों के साथ भय्यूजी भी वहां मौजूद थे. और वे उन लोगों में से थे जिन्होंने गुजरात के विकास का हवाला देते हुए मोदी का पक्ष लिया था.

6. अपने आश्रम में लगे चित्र में भारत माता के हाथ में हल थमाने वाला संत बड़े चाव से बताता है कि कैसे उसने महाराष्ट्र में पारदी समाज की महिलाओं को वेश्यावृत्ति से निकालने के लिए काम किया है और कैसे उनका ‘श्री सद्गुरु दत्त धार्मिक एवं पारमार्थिक ट्रस्ट’ अब तक 7,709 कन्याओं का विवाह करा चुका है.

7. वे सियाराम सूटिंग के लिए मॉडलिंग कर चुके ऐसे अध्यात्मिक गुरु हैं जो महंगी गाडिय़ों से परहेज नहीं करते, लेकिन ट्रस्ट के खाते में कितने पैसे हैं, इसे उंगलियों पर गिनाने के लिए तैयार रहते हैं. जब आप उनसे धार्मिक कार्यों के बारे में पूछते हैं तो वे सामाजिक कार्यों का ब्यौरा देते हैं.

8. भय्यूजी महाराज मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में वे सैकड़ों तालाबों का पुनर्निर्माण करा चुके हैं. देशभर में उन्होंने 19.39 लाख पौधे लगवाए हैं और लोकतंत्र में लोगों का भरोसा जगाने के लिए उनका ट्रस्ट अब तक संविधान की साढ़े 15 लाख प्रतियां बांट चुका है.

9. भय्यूजी महाराज एक नए किस्म के कर्मयोगी की छवि गढऩे में जुटे हैं. वे विवाहित हैं. उनकी एक बेटी है. और वे आम गृहस्थ की तरह इसी 2 मई को अपने पिताजी के निधन से पहले तक माता-पिता के साथ घर में रह रहे थे. उनकी मानें तो वे हर रोज कई सौ किमी की यात्रा करते हैं, ताकि जो सामाजिक कार्य वे कर रहे हैं, उन पर उनकी नजर रहे. वे फेसबुक, ट्विटर पर सक्रिय हैं औैर अपना ब्लॉग भी चलाते हैं.

10. प्रतिभा पाटील, नरेंद्र मोदी, नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह, उद्धव ठाकरे, पृथ्वीराज चौहान जैसे बहुत से नेताओं के साथ भय्यूजी महाराज की तस्वीरें आपको देखने को मिल जाएंगी. पहले यही लगता था कि कांग्रेस के नेता उनके ज्यादा करीब हैं, लेकिन अगर उनसे रिश्ता रखने वाले बीजेपी नेताओं की पड़ताल करें तो भी वैसी ही बात नजर आती है. उद्धव ठाकरे को बहुत अच्छा नेता मानने वाले भय्यूजी नरेंद्र मोदी की इस बात के कायल हैं कि मोदी अच्छे प्रस्तावों को बड़ी तेजी से पहचान लेते हैं और उन पर काम करते हैं.

11. इन राजनैतिक संबंधों के बावजूद वे मानते हैं कि सरकारें बहुत कुछ नहीं कर सकतीं. समाज उद्धार का काम समाज को ही करना होगा. और फिर अपनी बड़ी-बड़ी आंखों को गहराई से आपकी आंखों में डालते हुए समाज और सरकार, दोनों पर सवाल उठाते हैं, ”काले हिरण का शिकार करने वाले को पद्मश्री क्यों मिलना चाहिए? जो लोग 500 रु. फिल्म देखने पर खर्च कर सकते हैं, उन्हें महंगाई का रोना रोने का क्या हक है? समाज अगर गलत लोगों को अपना आदर्श बनाएगा तो खुद भी गलत दिशा में जाएगा.”

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