उन्नाव प्रशासन हो गया फेल मरीजों के साथ हो रहा खेल

उन्नाव प्रशासन की क्या दरियादिली है जो इन फर्जी व सरकारी डॉक्टर्स पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है?

Unnao administration is failing, a game going on with patients.

         

उन्नाव ब्यूरो।

आइये आपको मिलाते है, उन्नाव प्रसाशन व उनकी दरियादिली से। सबसे पहले बात करते हैं स्वास्थ सेवाओं की जो क़ि मौजूदा समय मैं जनपद के सवास्थ का ख़याल रख रही हैं। योगा दिवस मनाया जा रहा है ताकि जनता स्वस्थ रहे फिटनेस चेलेन्ज दिया जा रहा है, जिसमे हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी तक शामिल है, नारे दिए जा रहे हैं स्वस्थ इंडिया।

परन्तु क्या वाकई मैं स्वस्थ है इंडिया ये है सोचने की बात? उन्नाव, उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ व औधोगिक राजधानी कानपुर के बीच मैं बसा हुआ ऐसा जनपद जहां पर लखनऊ में बैठी सरकार को सबसे ज्यादा प्यार मिलता है, वो चाहे समाजवादी पार्टी की सत्ता हो या BJP की सत्ता। कहने को हर ब्लॉक में प्राथमिक स्वास्थ केंद्र उपलब्ध हैं परन्तु डॉक्टर के नाम पर क़ोई फार्मासिस्ट या प्राइवेट कर्मचारी ही इलाज करते मिलेगा और वो भी अगर उसको समय मिला तो।

आलम तो ये है क़ि जिला अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर अपने मरीजों को अपने व्यक्तिगत दवाखाने पर बुला कर इलाज करते हैं और मनमाना शुल्क वसूलते है। ये सब हो रहा है प्रशासन की नाक के नीचे मुख्य चिकित्सा अधिकारी के बगल में बने डॉक्टर्स रेसीडेंसी में। जब जिला अस्पताल की ये हालत है तो सोचने वाली बात से है क़ि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की क्या हालत होगी!

चलिए आपको उनके बारे में भी जानकारी देते हैं। प्राथमिक सवास्थ केंद्रों की जगह ले चुके हैं, झोलाछाप डॉक्टर जो की गावों में रह रही जनता को बेवकूफ बनाकर मनमाने ढंग से पैसे वसूल रहे हैं। यदि हाल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 6 महीनों के अंतराल मैं 12 लोगों की मृत्यु सिर्फ इन झोलाछाप डाक्टरों की वजह से हो चुकी है। ये वो मामले हैं जिसके बारे में रिपोर्ट हुई हैं। कार्यवाही के नाम पर उन्नाव प्रशासन ने चंद डॉक्टरों को जेल भी भेजा लेकिन सवाल उठता हैं आखिर ये मौतें कब तक होती रहेंगी? क्या प्रशाशन कोई सख्त कदम इस पर लेगा या मरीज के मरने पर ही इन फर्जी डॉक्टरों पर कार्यवाही करेगा? जबकि 6 महीने पहले बांगरमऊ छेत्र में एड्स के 12 से अधिक मरीजों की पुस्टि होने के बाद केंद्र से व NASI की टीम ने जांच कर प्रशाशन को जानकारी दी थी क़ि इस प्रकरण मैं झोलाछाप डॉक्टर्स की भूमिका है। सिर्फ बांगरमऊ छेत्र मैं 50 से अधिक फर्जी डॉक्टर व् पूरे जनपद में 300 से अधिक फर्जी डॉक्टर उपलब्ध हैं। यहीं पर उठता है हमारा सवाल आखिर उन्नाव प्रशासन की क्या दरियादिली है जो इन फर्जी व सरकारी डॉक्टर्स पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है? वही हमारे विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस तरह से दोनों की चाँदी कट रही है और अच्छी खासी रकम कमाई जा रही है।

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