हमारा देश हर साल एक ऑस्ट्रेलिया जितना आबादी पैदा करता है : विश्व जनसँख्या दिवस पर विशेष

बढ़ती जनसंख्या पर्यावरण के लिए दीमक की तरह है जो प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर रहा है।

Our country produces a population like Australia every year: Special on World Population Day.

     

2011 में भारत देश की आबादी 121 करोड़ थी। आज हमारे देश की आबादी 1 अरब 35 करोड़ पार कर चुकी है। भारत की भूमि का फैलाव पूरे विश्व की धरती का कुल 2.4 फीसद ही है जबकि यहां की जनसंख्या विश्व की कुल जनसंख्या का पांचवां हिस्सा है। तेजी से बढ़ती आबादी से हमारे देश में हर साल एक ऑस्ट्रेलिया पैदा हो जाता है।अगर समय रहते जनसंख्या की रफ्तार को कम न किया गया तो 2025 तक भारत महाशक्ति बने न बने दुनिया की सर्वाधिक जनसंख्या वाला देश जरूर बन जाएगा। दुनिया में करीब 245 देश हैं जिनकी कुल आबादी का 35 फीसद हिस्सा केवल चीन (18%) और भारत (17%) में बसता है। चीन की जनसंख्या फिलहाल 1,38,42,00,000 और भारत की 1,31,83,50,000 है।

बढ़ती आबादी को लेकर विरोधाभास है एक तरफ आबादी को संसाधन माना जाता है तो दूसरी ओर समस्या।भारत की जनसंख्या आज विस्फोट के कगार पर है। सरकार जन कल्याण की तमाम योजनाएं चला रही है। गरीब और निचले तबकों के विकास का प्रयास कर रही है, लेकिन कोई भी योजना सफल नहीं हो पा रही है। इसके पीछे जनसंख्या का अनियंत्रित होना है। सरकार चाहे जितने भी मेडिकल संस्थान व शिक्षण संस्थान या जितनी भी जनसेवाओं की व्यवस्था कर ले लेकिन यह सुविधाएं पूरी तरह से फेल ही हो जाएंगी। इसके लिए जरूरी है कि सरकार सख्त फैसलों के साथ जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास करे। देश में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ाने में जनसंख्या के अनियंत्रित होने की बड़ी भूमिका है।

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बढ़ती जनसंख्या पर्यावरण के लिए दीमक की तरह है जो प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर रहा है। यह लोगों की मानसिक दशा पर भी असर डाल रहा है। भारत जैसे देश में जनसंख्या पर लगाम लगाना बहुत मुश्किल है जहां जनसंख्या को राजनीतिक और धार्मिक विचारधारा को बढ़ाने के माध्यम की तरह देखा जाता है।

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