वक़्त का तकाज़ा

जिंदगी जीने को एक मर्तबा फिर तैयार होगी..

Time never wait for anyone.

अक्सर जनाज़े पे तारीफों के कलाम कहते है,
क्योकि जीतेजी ये सारे कलाम गुम नाम रहते है..
जब जाना पड़े जनाज़े पर आंसू ये छलक आते है,
जीते जी तो मिलने को लम्हे भी न चुरा पाते है..

जब देखते है उस इंसान को सौ भाव उमड़ आते है,
मगर जीते जी ये भाव सारे मुट्ठी में सिमट जाते है..
किसी कोने में छिप जाते है या रोने में बहे जाते है,
दिल में ये दब जाते है पन्नो में फट जाते है..

न जाने कहाँ जाते है,
कुछ बातें करने को जी भर के झगड़ने को..
रूठ कर मिलने को साथ गिर कर सँभालने को,
अब दिल चाहता है बंधन सारे तोड़ने को..
अब दिल चाहता है पर वक़्त चला जाता है वो शख्श चला जाता है,
उसकी रगो में जो बहता था वो रक्त चला जाता है..

जब उठती है अर्थी तब हिलती धरती है,
तब जाकर ये एक बात मन को खटखटाती है..
कि दौलत सोहरत नौकरी में सारी उमर निकल जाती,
क्यों जिंदगी जीने के लिए जनाज़े तक रुक जाती है..
क्यों कभी नफरत दिल में इतनी भर जाती है,
कि जीवन की अनत खुशियां महज़ स्मृति कहलाती है..
क्यों न उगते दिनकर को हम हमेशा जागए रखें,
क्योकि सुबह फिर होगी, होगा जो भी मर्ज़ उसकी दवा जरूर होगी..
जिंदगी जीने को एक मर्तबा फिर तैयार होगी..

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