जाँच में दोषी खाद्यान्न जिलापूर्ति विभाग के भ्रष्ट कर्मचारियों पर मेहरबान प्रदेश व् मऊ जिला प्रशासन


Due to investigation, the corrupt officials of the Food Distribution Department, polite Mau District Administration.

     

उत्तर प्रदेश में वैसे तो मुख्यमंत्री द्वारा लगभग हर रोज ही भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने की बातें की जाती हैं। लेकिन मुख्यमंत्री की बातें धरातल पर एक जुमले से ज्यादा कुछ भी प्रतीत नहीं होती हैं। आपको यह जानकर हैरानी होगी की हर शासन की तरह भाजपा शासन में भी गरीबों के थाली के राशन में एक बड़ी सेंधमारी हुई है। गोण्डा,मऊ,समेत लगभग 40 से ज्यादा जिलों में 12 करोड़ से भी अधिक धनराशी के अनाज को भ्रष्ट कर्मचारियों और खाद्यान्न माफियाओं द्वारा डकारे जाने की आशंका है। इतने बड़े घोटाले ने भाजपा के सुशासन के नींव को काफी हद तक कमज़ोर किया है। घोटाले के सामने आने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कड़ी कार्यवाही की गई थी,और मुख्यमंत्री द्वारा जांच के आदेश भी दिए गए और अफसरों को कड़ी चेतावनी भी।लेकिन मुख्यमंत्री के निर्देश और चेतावनी का असर केवल अखबार की सुर्खियों तक ही सीमित रह गया। उनकी चेतावनी का असर ना तो खाद्यान्न माफियाओं पर हुआ न ही खाद्य एवं रसद विभाग के कर्मचारियों पर होता दिख रहा है। आपको बता दें इसी तरह का एक घोटाला पिछले कई वर्षों से मऊ जिले में लगातार अपनी जड़ फैलाये हुए है जिसमे कर्मचारियों द्वारा मनमाने ढंग से कार्ड व यूनिट में बढ़ोतरी कर राशन में हेरफेर कर सरकार के राजस्व को लाखों का चूना लगाया जा रहा है जिसकी शिकायत जिले के परदहां वार्ड न०6 से भाजपा सभासद दिनेश कुमार सिंह द्वारा आयुक्त खाद्य एवं रसद जवाहर भवन लखनऊ व उपायुक्त खाद्य एवं रसद वाराणसी मंडल से की गई थी। उपायुक्त खाद्य एवं रसद वाराणसी मंडल द्वारा सभासद की शिकायत पर जांच की गई तथा अपनी जांच में उन्होंने मऊ जिलापूर्ती कार्यालय में तैनात धीरज कुमार अग्रवाल, लिपिक अरविंद कुमार,पूर्ति निरीक्षक हर्षिता राय,पूर्ति निरीक्षक साजिद शिकोह,व वर्तमान गाजीपुर क्षे०खाद्य अधिकारी मनोज कुमार सिंह को पदीय दायित्वों के निर्वहन में असफल एवम भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की संस्तुति की है।

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उपायुक्त खाद्य एवम रसद द्वारा इन भ्रष्ट कर्मियों के खिलाफ एक तरफ शासन से कार्यवाही करने की मांग की जा रही हैं वहीं दूसरी तरफ मऊ जिलापूर्ती अधिकारी द्वारा उपायुक्त खाद्य एवं रसद वाराणसी मंडल के आदेश की धज्जियां उड़ा कर भ्रष्ट कर्मियों को उनके मनमाफिक क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। हमारे सूत्रों ने हमें यह बताया कि जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद भी पूर्ति निरीक्षक हर्षिता राय को नगर पालिका में भेज कर जिलापूर्ती अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने अपनी मनमानी का पुनः एक बार फिर से परिचय दिया है। यह बात तो समझ से परे है आखिर किस बल पर एक जिलापूर्ती अधिकारी द्वारा जिले में इस तरह से लगातार मनमानी की जा रही है और आखिर क्या कारण है कि जिलापूर्ती अधिकारी द्वारा की जा रही मनमानियों को जिलाप्रशासन द्वारा बड़ी खामोशी के साथ देखा जा रहा है। जिलाप्रशासन द्वारा जिलापूर्ती अधिकारी के मनमानियों पर ध्यान न देना कहीं उनके निजी स्वार्थ को सिद्ध तो नही कर रहा। कारण कुछ भी हो लेकिन जिले में अधिकारियों द्वारा इस तरह की मनमानी कहीं न कहीं सरकार के नीतियों पर एक करारा तमाचा है।

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