मऊ जिलापूर्ती अधिकारी के आगे धृतराष्ट्र साबित हो रहे शासन और मऊ जिला प्रशासन।


The provincial governing body and the Mau District Administration like Dhritarashtra against Mau District Supply Officer. 

     

उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के पश्चात भी अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा किये जा रहे भ्रष्टाचार,मनमानी और अनियमितताओं में अभी तक किसी भी प्रकार की रत्ती भर भी कोई कमी देखने को नहीं मिली है। आपको यह जानकर हैरानी जरूर होगी कि प्रदेश में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के सख्ती के कारण जहां सिस्टम में निहित भ्रष्टाचार पकड़ में तो आ रहे हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ अधिकारियों की मनमानी और लापरवाही से भ्रष्टाचार के मामलों में कार्यवाही करने की जगह उस पर लीपा-पोती कर के या मामले को लटका कर उस पर से लोगों का ध्यान हटाने का कार्य किया जा रहा है। आपको बता दें मऊ जिले के परदहां वार्ड न०-6 से भाजपा सभासद दिनेश कुमार सिंह द्वारा की गई शिकायत पर उपायुक्त(खाद्य) वाराणसी मण्डल ने अपनी जांच में धीरज कुमार अग्रवाल, लिपिक अरविंद कुमार,पूर्ति निरीक्षक हर्षिता राय, पूर्ति निरीक्षक साजिद शिकोह व वर्तमान गाजीपुर क्षे० खाद्य अधिकारी मनोज कुमार सिंह को दोषी करार देते हुए शासन को 17/07/18 को जांच आख्या सौंप कर अनुशासनात्मक कार्यवाही की संतुति की है। जिसके उपरान्त अभी तक लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल, लिपिक अरविंद कुमार,पूर्ति निरीक्षक हर्षिता राय,पूर्ति निरीक्षक साजिद शिकोह,व वर्तमान गाजीपुर क्षे० खाद्य अधिकारी मनोज कुमार सिंह पर किसी प्रकार की कोई भी कार्यवाही सामने नही आई है।

इसी के साथ ही 13/09/18 को आयुक्त खाद्य एवम रसद विभाग,उत्तर प्रदेश जवाहर भवन,लखनऊ द्वारा जारी पत्रांक संख्या 5855/आ०पू०अधि०-42/2006 में लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल व अरविन्द कुमार के विरुद्ध मऊ जिलाधिकारी बिंदु प्रकाश से अनुशासनात्मक कार्यवाही करने को कहा गया है। लेकिन मऊ जिलाधिकारी ने कौरवों के भीड़ में धृतराष्ट्र का फर्ज निभाते हुए नरेंद्र तिवारी के आगे खुद को निष्क्रिय साबित करके भ्रष्टाचार के समर में चुप रह कर अब तक उनका ही सहयोग किया है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर जिले में हो रही राशन चोरी का असली गुनाहगार कौन है। क्या गुनहगार उन कर्मचारियों को माना जाए जो जिले में हो रहे भ्रष्टाचार में प्रत्यक्ष रूप से दोषी सिद्ध हुए हैं,या फिर उनको माना जाए जो लगातार भ्रष्ट सिद्ध कर्मचारियों को बचाने के लिए अपने पद का गलत उपयोग कर अपने कर्तव्यों से भी विमुख हो रहे हैं,या फिर असली दोषी उस धृतराष्ट्र को माना जाए जो सब कुछ जानते हुए भी कौरव सभा का मुखिया बन कर सभा मे बैठ इस भ्रष्टाचार के खेल का असली आनंद उठा रहा है। दोषी कोई भी हो लेकिन एक बात तो साफ है कि मुख्यमंत्री योगी प्रदेश में सुधार लाने के लिए कितनी भी प्रतिज्ञा कर लें उनकी मशीनरी ही उनके इरादों को कुचलने में सबसे आगे खड़ी है और मऊ जिले के आला अधिकारी और जिलाप्रशासन भी इसी कवायद में जुटे हैं।

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