अण्णा के बस कंडक्टर से सुपरस्टार बनने तक का कठिन सफर


The hard journey from Anna’s bus conductor to becoming a superstar.

  

आज रजनीकांत का जन्मदिन है और यह 68 साल के हो चुके है. दरअसल इनका इनका इस साल का जन्मदिन सबसे खास है क्योकि इनकी फिल्म 2.0 जो इनकी अबतक की सबसे महंगे बजट की फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी काफी धमाल मचा रही है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि कैसे एक बस कंडक्टर आज करोड़ो दिलो पर राज करने वाला “दा बॉस” बन गया है. रजनीकांत ने यहाँ तक पहुंचने के लिए इन्होने काफी संघर्ष किया है. रजनीकांत का असल नाम शिवाजी राव गायकवाड़ है. तमिल फिल्म से लेकर बॉलीवुड फिल्म तक इन्होने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से करोड़ो दिलो में अपनी एक अलग जगह आना ली है.

रजनीकांत को साल 2000 में भारत सरकार की तरफ से पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. इनका जन्म 12 दिसम्बर 1950 को बेंगलुरु में हुआ था. रजनीकांत ने साल 1975 में फिल्म ‘अपूर्व रागंगल’ से अपने करियर की शुरुआत की. इसके बाद उन्होंने ‘अंधा कानून’, ‘इंसाफ कौन करेगा’, ‘कबाली’ और ‘शिवाजी द बॉस’ जैसे बहुत सी फिल्मो में दमदार भूमिका निभाया है.

मीडिया सूत्रों के मुताबिक रजनीकांत का जीवन बहुत ही ज्यादा संघर्ष से भरा रहा है. यह अपने सभी भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. और बचपन में ही इनकी मां का निधन हो गया था. मां के निधन के बाद रजनीकांत के घर की हालत बहुत ज्यादा अच्छी नहीं थी, जिस वजह से इन्होने बहुत से छोटे मोटे काम किये है. घर चलने ज्यादा मुश्किल हो रहा था इस लिए इन्होने बस कंडक्टर का ही काम किया है.

साल 1985 में सुपरस्टार रजनीकांत ने अपनी 100 फिल्में पूरी कर ली थी, ‘श्री राघवेंद्र’ रजनीकांत की 100वीं फिल्म थी और इस फिल्म में इन्होने हिंदू संत राघवेंद्र स्वामी का किरदार निभाया था. इन दिनों यह अपनी नयी फिल्म 2.0 के लिए छाय हुए है. इस फिल्म की वजह से यह काफी ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए है.

रजनीकांत की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है की इनकी यह 600 करोड़ के बजट से बनी फिल्म ‘2.0’ ने रिलीज के पहले ही 490 करोड़ की कमाई कर ली थी. वहीं रिलीज के बाद से अब तक फिल्म ने तीन हफ्तों में ही 600 करोड़ से ज्यादा का रिकॉर्ड बॉक्स ऑफिस पर दर्ज करवा लिया है.

इनकी कहानी से हम सभी को सिख लेनी चाहिए कि कोई भी काम छोटा नहीं होता बस अगर कोई भी इंसान अपने काम की इज्जत करे तो उसे कामयाबी जरूर मिलती है. अगर रजनीकांत भी यह सोचते की मैं बस कंडक्टर का काम नहीं करूँगा तो शायद वो आज इस मुकाम पर नहीं होते, लेकिन अपने समय को देखते हुए इन्होने इस काम को भी किया और अपनी म्हणत से अपने बुरे समय को बदलने का इंतजार किया.

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