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भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने में विफल मऊ जिलाप्रशासन और प्रदेश की भाजपा सरकार।

भ्रष्टाचारियों  पर नकेल कसने में विफल मऊ जिलाप्रशासन और प्रदेश की भाजपा सरकार।

भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने में विफल मऊ जिलाप्रशासन और प्रदेश की भाजपा सरकार।

Failure to crack down on corrupt people, the district administration and the BJP government in the state failed.

     

उत्तर प्रदेश का मऊ जिला पिछले कुछ महीनों से खाद्यान्न संबंधित अनियमितताओं के लिए पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहा है। आधार ऑथेंटिकेशन के जरिये हो रही अनाज की चोरी हो या फिर जिलापूर्ति कार्यालय में तैनात अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा कोटेदारों को धमका कर की जा रही अवैध वसूली हो,मऊ जिला हर प्रकार के भ्रष्टाचार में शिखर पर पहुँच चुका है। आपको बता दें की मऊ जिले के शिकायतकर्ता परदहां वार्ड संख्या० 6 से भाजपा सभासद दिनेश कुमार सिंह के शिकायत के अनुसार मऊ जिलापूर्ती कार्यालय में तैनात पूर्ति निरीक्षक हर्षिता राय एवँ लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल तथा जिलापूर्ति अधिकारी के अंतर्गत काम करने वाले प्राइवेट कर्मचारी अजीत सिंह एवं चपरासी नारायण यादव तथा अन्य के द्वारा बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार विगत कई वर्षों से किया जा रहा है जिसकी शिकायत उन्होंने विभाग के लगभग हर अधिकारी व मुख्यमंत्री समेत खाद्य एवं रसद विभाग के राज्यमंत्री अतुल गर्ग से भी की थी।

मऊ जिले के शिकायतकर्ता भाजपा सभासद दिनेश कुमार सिंह द्वारा जिन 12 दुकानों में अनियमितता की शिकायत शासन से लेकर प्रशासन तक की गई थी उनमें से 9 दुकान ऐसी हैं जिनमे कंप्यूटर ऑपरेटर व भ्रष्ट कर्मचारियों द्वारा आधार ऑथेंटिकेशन सुविधा का दुरूपयोग करके सरकार के राजस्व को लाखों का चूना लगाया जाता रहा है। लेकिन मऊ जिलापूर्ती अधिकारी द्वारा आयुक्त खाद्य एवं रसद जवाहर भवन लखनऊ के आदेश के उपरांत भी भ्रष्ट कॉम्प्यूटर ऑपरेटर और जिले में पूर्व से ही भ्रष्टाचार में लिप्त निरीक्षक हर्षिता राय एवँ लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल तथा चपरासी नारायण यादव व अन्य सभी को बचाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि खाद्य आयुक्त ने पत्रांक जारी कर भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों से पिछले महीने ही स्पष्टीकरण की मांग की थी लेकिन अभी तक इन कर्मचारियों पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नही देखने को मिली है।

हमारे सूत्रों की माने तो जिले में तैनात जिलापूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी सारे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का पूरा प्रयास कर रहे हैं जिससे भ्रष्टाचार में उनकी संलिप्तता उजागर न हो पाए और आपको यह भी बता दें वर्तमान मऊ जिलापूर्ति अधिकारी नरेंद्र तिवारी पर पूर्व में भी उनके द्वारा कुशीनगर में किये भ्रष्टाचार की जांच फैजाबाद उपायुक्त द्वारा पिछले काफी महीनों से की जा रही है। जिसमे भी अभी तक किसी प्रकार की कोई कार्यवाही देखने को नहीं मिली है।विशेष सूत्रों द्वारा हमको यह बताया गया है की जिले के परदहां वार्ड न०6 से भाजपा सभासद दिनेश कुमार सिंह द्वारा की गई शिकायत पर उपायुक्त(खाद्य) वाराणसी मण्डल ने अपनी जांच में धीरज कुमार अग्रवाल, लिपिक अरविंद कुमार,पूर्ति निरीक्षक हर्षिता राय,पूर्ति निरीक्षक साजिद शिकोह,व वर्तमान गाजीपुर क्षे० खाद्य अधिकारी मनोज कुमार सिंह को दोषी पाया था तथा रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी। वहीं दूसरी तरफ इन भ्रष्टकर्मियों की लगातार हो रही शिकायत के बावजूद भी इनको जिलापूर्ती अधिकारी नरेंद्र तिवारी का लगातार संरक्षण प्राप्त है।

हमारे विशेष सूत्रों ने हमे यह भी बताया कि यह ज्ञात होने पर की जांच में ये सभी दोषी हैं उसके बावजूद भी भ्रष्ट लिपिक अरविंद कुमार को हटाने की बजाए उसको सबसे कमाऊ माने जाने वाली मधुबन तहसील में नियुक्त किया गया है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि लिपिक अरविंद कुमार वाराणसी में जिलापूर्ती कार्यकाल में बाबू के पद पर कार्यरत रह चुका है जहां खुद जिलापूर्ती अधिकारी नरेंद्र तिवारी कार्यरत थे। यही हाल प्राइवेट कर्मचारी अजित सिंह का भी है जो नरेंद्र तिवारी के साथ गाजीपुर में कार्य कर चुका है व वर्तमान में इसके विरुद्ध गाजीपुर में आधार ऑथेंटिकेशन दुरूपयोग करने के लिए एफ.आई.आर दर्ज कराई गई है। जिले में इस तरह के क्रियाकलापों और नियुक्तियों को देख कर यह लगता है कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिले में भ्रष्टाचार का एक मजबूत सिंडिकेट बना लिया है।

वहीं उत्तर प्रदेश में आधार ऑथेंटिकेशन से हुए भ्रष्टाचार की जड़ें लगभग 40 जिलों में फैली हुईं हैं जिसमे चल रही जांच में गजब की अनियमितता देखने को मिल रही है। उत्तर प्रदेश के मऊ,गोण्डा जैसे जिलों में जिलाप्रशासन की लापरवाही सामने खुल कर आई हैं लेकिन हर जगह विभाग जांच को लंबित कर भ्रष्टचारियों के पक्ष में ही खड़ा दिख रहा है। अब देखना यह है कि आने वाले चुनाव में भाजपा सरकार सुशासन की बातें किस आधार पर करती है क्योंकि तमाम अनियमितताओं की जांच में सरकार की कार्यशैली खुद ही एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

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