Thursday, July 18, 2024
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नरेंद्र मोदी ने जमकर की जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तारीफ..

SI News Today

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को भारत में मुस्लिम धर्मगुरुओं के सबसे बड़े समूह जमीयत उलेमा-ए-हिंद की तारीफ की। मोदी ने गुजरात में आई बाढ़ के दौरान राहत कार्यो में सहयोग देने और खासकर 22 मंदिरों और दो मस्जिदों की सफाई करने के लिए जमीयत को सराहा। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा, “गुजरात ने हाल ही में विनाशकारी बाढ़ देखी। कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, जब पानी का स्तर कम हुआ तो हर जगह बहुत ज्यादा गंदगी थी।

उस समय गुजरात के बनासकांठा के धनेरा में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के स्वयंसेवकों ने 22 मंदिरों और दो मस्जिदों की चरणबद्ध ढंग से सफाई की।”प्रधानमंत्री ने कहा, “वे एक साथ आए और सामूहिक रूप से सफाई की। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के स्वयंसेवकों ने स्वच्छता को लेकर एकजुटता का एक अच्छा और प्रेरक उदाहरण पेश किया। अगर स्वच्छता के प्रति यह प्रतिबद्ध प्रयास हमारी स्वभाविक आदत बन जाती है तो हमारा देश निश्चित रूप से अधिक ऊंचाइयों पर जाएगा।” उन्होंने लोगों से गांधी जयंती (2 अक्टूबर) से कम से कम 15-20 दिन पहले ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान शुरू करने के लिए कहा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को निश्चित तौर पर सजा दी जाएगी। मोदी ने यह टिप्पणी अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कही। यह टिप्पणी हरियाणा में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दुष्कर्म का दोषी करार दिए जाने के बाद हुई हिंसा के दो दिन बाद आई है। इस हिंसा में 36 लोगों की मौत हो गई।

मोदी ने किसी राज्य का नाम लिए बगैर कहा कि जब देश के एक हिस्से से हिंसा की खबर आती है, तो चिंतित होना स्वाभाविक है। मोदी ने कहा, “मैं अपने देशवासियों को भरोसा देना चाहता हूं कि जो लोग अपने हाथों में कानून लेंगे और हिंसा के रास्ते पर चलेंगे, चाहे वह कोई व्यक्ति हो या समूह, उन्हें न तो यह देश न ही कोई सरकार बर्दाश्त करेगी। हर एक व्यक्ति कानून से बंधा हुआ है, कानून जवाबदेही तय करेगा और दोषी को निश्चित तौर पर दंडित किया जाएगा।”

प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भीड़ द्वारा होने वाली हिंसा में शामिल लोगों को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा, “हम अपने बचपन से सुनते व कहते रहे हैं कि अहिसा परमो धर्मा। मैंने लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि आस्था के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं होगी, चाहे यह सांप्रदायिक विश्वास या राजनीतिक विचारधारा के तहत हो, या फिर यह किसी व्यक्ति या रीति-रिवाज या परंपराओं के प्रति निष्ठा से उपजी हो। किसी को भी किसी भी विश्वास के आधार पर कानून को अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है।”

मोदी ने कहा कि अहिंसा व परस्पर सम्मान के मूल्य भारतीयों में सदियों से समाहित हैं। मोदी ने कहा, भारत भगवान बुद्ध, महात्मा गांधी और सरदार पटेल की धरती है जिन्होंने देश की एकता के लिए सब कुछ त्याग दिया। सदियों से हमारे पूर्वजों ने सामुदायिक मूल्य, अहिंसा व परस्पर सम्मान को आत्मसात किया है, यह हममे अन्तर्निहित है।” मोदी ने कहा कि एक तरफ देश में पर्व का माहौल है और दूसरी तरफ हिंसा की खबर है। उन्होंने कहा, “हमें डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान में हर व्यक्ति के लिए न्याय सुनिश्चित करने का प्रावधान है।”

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