Saturday, April 20, 2024
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मुस्लिम ना होते हुए भी इन युवाओं ने की 120 साल पुरानी मस्जिद की सुरक्षा

SI News Today

पश्चिम बंगाल के बसिरहाट इलाके में एक आपत्तिजनक फेसबुक पोस्ट के बाद भले ही हिंसा भड़क रही हो, लेकिन लोगों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारा अभी भी मौजूद है। एक और जहां पुलिस हिंसा रोकने में जुटी है, ऐसे में अलग-अलग समुदाए के कुछ युवकों ने मिसाल पेश की है। बसिरहाट इलाके के खनपाड़ा गांव में चार युवाओं ने मिलकर 120 साल पुरानी मस्जिद की सुरक्षा की। बंगाल के एक स्थानीय अखबार में छपी खबर के मुताबिक, इन युवाओं के नाम सुमेन रॉय चौधरी, फयाज खान, इमरान खान और अरित्रो बनर्जी थे। इन चार में से दो भले ही मुस्लिम रहे हों, लेकिन मुस्लिम ना होते हुए भी दो अन्य युवकों ने उनका पूरा साथ दिया।

इकॉनमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शरारती तत्वों द्वारा मस्जिद पर हमले की आशंका के बीच इन चारों ने रात भर जागकर सुरक्षा की। मुस्लिम आबादी वाले इस गांव के लिए सदियों पुरानी यह मस्जिद गौरव का विषय रही है। गांव में 50 मुस्लिम परिवार हैं, वहीं हिन्दू परिवारों की संख्या केवल 2-3 है। रॉय चौधरी ने मीडिया से कहा, “मस्जिद को किसी भी कीमत पर बचाना था। इसे टूटने से बचाने के लिए हम अपने खून का आखिरी कतरा तक बहाने को तैयार थे।” उनके दोस्त इमरान खान ने कहा कि हमने मस्जिद की सुरक्षा और चौकसी के लिए एक ग्रुप तैयार किया था। हालांकि युवाओं के इस ग्रुप को उस समय लोगों को शांत कराने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी जब एक स्थानीय मौलवी ने तनाव पैदा कर दिया।

फिरोज खान ने कहा, “हमने मौलवी को समझाया कि अगर वह लोगों को ऐसे ही भड़काता रहा तो हम उसे गांव से बाहर कर देंगे। उसे सांप्रदायिक सौहार्द खत्म करने का कोई हक नहीं है।” बता दें कि सोमवार (तीन जुलाई) को बशीरहाट में तब हिंसा भड़क उठी जब कथित तौर पर एक नाबालिग लड़के ने फेसबुक पर एक आपत्तिजनक पोस्ट डाल दी। हालांकि पुलिस हिरासत में ले लिए गए किशोर ने विवादित पोस्ट डालने से इनकार किया है। उसका कहना है कि उसका फोन चोरी हो गया था। बंगाल हिंसा में अब तक एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

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