Friday, January 27, 2023
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डिरेल टाइम टेबल को पटरी पर लाएगा रेलवे!

SI News Today

Railway will bring the time table to the rail!

@indianrailway__ 

ट्रेनों के लगातार लेट होने से यात्री भारतीय रेल से काफी नाराज हैं. उनका गुस्‍सा भी जायज है क्‍योंकि 2017-18 में ट्रेनों के समय पर पहुंचने का आंकड़ा शर्मनाक है. इस अवधि में मात्र 70 फीसदी ट्रेनें ही समय पर स्‍टेशन पहुंचीं. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्‍वि‍नि लोहानी ने जब यह आंकड़ा देखा तो वह आगबबूला हो गए. उन्‍होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रेल अफसरों को कड़ी फटकार लगाई. अफसरों ने बताया कि मरम्‍मत के कारण ट्रेनों की रफ्तार रीशिड्यूल की गई है. इस पर लोहानी ने कहा कि बीते साल ट्रेनों का पंक्‍चुएलिटी ग्राफ काफी निराशाजनक रहा है. मरम्‍मत का काम भी जरूरी है लेकिन जिन रूटों पर सबसे ज्‍यादा ट्रेन लेन हो रही है उस पर आला अफसर तत्‍काल ध्‍यान दें और नियमित निगरानी कर लेट होने का कारण पता लगाएं. एक-एक कर ट्रेन शिड्यूल को पटरी पर लाएं. इस समय पैसेंजर से लेकर कई मेल और एक्‍सप्रेस ट्रेनें घंटों लेट चल रही हैं. अभी तक लंबी रूट की ट्रेनों में ऐसी समस्‍या आती थी लेकिन अब कम दूरी की ट्रेनें भी घंटों लेट हो रही हैं.

8 जोन में ट्रेन सबसे ज्‍यादा लेट
लोहानी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से 8 जोन के रेल महाप्रबंधकों से बात की. ये वे जोन हैं जहां ट्रेन ज्‍यादा लेट चल रही हैं. इनमें नॉर्दन रेलवे, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे, ईस्‍ट रेलवे, नॉर्थ ईस्टर्न रेलवे, साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे, ईस्ट कोस्ट रेलवे, ईस्ट सेंट्रल रेलवे, और नॉर्थ ईस्‍ट सेंट्रल रेलवे शामिल हैं. लोहानी ने इन महाप्रबंधकों से चालू वर्ष में ट्रेनों की पंक्‍चुएलिटी पर बात की. लोहानी ने उन ट्रेनों पर खासतौर से चर्चा की जो लगातार देरी से चल रही हैं. लोहानी ने कहा कि अफसर रोजाना रिपोर्ट देंगे. बोर्ड की मंशा है कि ट्रेनें समय पर चलें. रेलवे बोर्ड ने साफ किया है कि 18 मई तक वह इस पर नजर रखेगा.

ट्रेन टाइम टेबल पटरी पर लाएगा रेलवे
ट्रेनों के लगातार लेट होने से परेशान यात्रियों के लिए रेलवे ने 4 मई से 18 मई तक अभियान शुरू किया है. रेलवे बोर्ड ने महाप्रबंधक भारतीय रेलवे को आदेश जारी किए हैं. फाइनेंशियल एक्‍सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक लोहानी ने कहा कि बीते साल का पंक्‍चुएलिटी ग्राफ बेहद खराब है. वहीं 2016-17 में यह आंकड़ा 76.69 फीसदी रहा था जबकि 2015-16 में 77.‍44 फीसदी था. इससे यही लगता है कि रेलवे की दशा साल दर साल खराब हो रही है. सभी अफसर रेलवे बोर्ड के निर्देश को गंभीरता से लें.

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