Friday, July 19, 2024
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ब्लू ह्वेल चैलेंज गेम से उत्तर प्रदेश में हुई पहली मौत…

SI News Today

हमीरपुर: जल्द ही मैं गेम का अंतिम लेवल भी पार कर लूंगा। मेरी जीत तय है। हालांकि यह देखने के लिए मैं नहीं रहूंगा फिर भी हर कीमत पर जीतना चाहता हूं…। कुछ यही सोचकर मोबाइल फोन हाथ में लेकर कक्षा छह के छात्र ने फांसी लगाकर जान दे दी। मौके पर मिले साक्ष्य यह साफ बता रहे हैं कि 13 वर्षीय छात्र ने ऐसा कदम ‘ब्लू व्हेल चैलेंज गेम’ (ब्लू वेल) के आखिरी चैलेंज को पूरा करने के लिए उठाया था। जब उसके शव को फंदे से उतारा गया तो उस वक्त यही गेम मोबाइल पर चल रहा था।

पापा का फोन लेकर खेला गेम
हमीरपुर के मौदहा कस्बे के मिशन कंपाउंड निवासी विक्रम सिंह का इकलौता पुत्र पार्थ सिंह मुख्यालय के जयपुरिया पब्लिक स्कूल में कक्षा छह का छात्र था। रविवार शाम करीब पांच बजे वह अपने पापा का फोन लेकर गेम खेल रहा था। इसी दौरान पार्थ अचानक अपने कमरे में चला गया और बेड के ऊपर कुर्सी रख गमछा के सहारे पंखे से फांसी लगा ली।

आवाज लगाने के बाद जब कोई जवाब नहीं मिला तो विक्रम उसके कमरे में पहुंचे। वहां बच्चे को फांसी पर लटका देख उनके होश उड़ गए। शोर सुन उनकी पत्नी भी पहुंच गई। मोहल्ले वाले भी आ गए। विक्रम ने बताया कि कुछ दिनों से वह मोबाइल पर गेम खेल रहा था। उसे कई बार टोकने के साथ ही डांटा भी था। इसके बाद चोरी-छिपे गेम खेलने लगा। उसे अपने दोस्त की जन्मदिन पार्टी में जाना था। सुबह से वह पार्टी में जाने की तैयारी कर रहा था। उसकी मां उसके लिए मिठाई बना रही थी। इकलौते पुत्र की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

गेम की वजह से मौत की बात सामने आई
मौदहा इंस्पेक्टर प्रमेंद्र सिंह ने बताया कि मौके से मोबाइल फोन मिला है। प्रथम दृष्टया गेम खेलने की बात सामने आई है। जांच के बाद मामले की सच्चाई पता चलेगी। हालांकि उसके शरीर पर किसी तरह का कोई चिह्न नहीं बना था। एडीएमकुंज बिहारी ब्लू व्हेल गेम की वजह से किसी के जान देने की जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी और अगर गेम की वजह से जान जाने की बात सामने आई तो इस पर प्रभावी तरीके से रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।

ब्लू-वेल गेम 50 दिन 50 टास्क और खेल खत्म
ऑनलाइन गेम ब्लू-वेल चैलेंज पिछले काफी समय से भारत में चर्चित है। लगभग 50 दिन तक चलने वाले इस खेल में खिलाड़ी को 50 टास्क्स करने होते हैं, जिनमें से कई में खुद को नुकसान भी पहुंचाना होता है। इस खेल के आखिर में खिलाड़ी को करना सुइसाइड होता है । इस पूरे खेल के दौरान खिलाड़ी को अपने सभी कारनामों के विडियो बनाकर उस ‘वेल’ या इंस्ट्रक्टर को भेजने होते हैं जो अभी तो उसे इंस्ट्रक्ट करता रहा हो। दुनियाभर में इस चैलेंज की वजह से लगभग सवा सौ से अधिक मौतें हो हो चुकी हैं। भारत में भी कई यंगस्टर्स इसके चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने गूगल, फेसबुक, वॉट्सऐप, इंस्टाग्राम और याहू से इस खेल से जुड़े लिंक्स हटाने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय ने इस खेल पर बैन लगाने की मांग की थी।

गेम की शुरुआत
इस खेल की शुरुआत 2013 में रूस से हुई। सोशल नेटवर्किंग साइट खेले जाने वाले इस गेम वजह से पहली मौत 2015 में हुई। रूस की एक यूनिवर्सिटी से बाहर किए गए स्टूडेंट फिलिप बुदेकिन ने दावा किया था कि उसने यह खेल बनाया है। उसके मुताबिक उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह चाहता था कि समाज साफ हो जाए। उसके मुताबिक उन लोगों को खुदकुशी के लिए उकसाकर ऐसा किया जा सकता है जिनकी, उसके मुताबिक, कोई वैल्यू नहीं थी। उसे 16 टीनेजर्स को कुदकुशी के लिए उसकाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। 11 मई को बुदेकिन को आरोपी करार देकर 3 साल की सजा सुना दी गई। ब्लू-वेल का संबंध वेल्स के सुइसाइड से है।

भारत में ब्लू-वेल चैलेंज से मौतों का सिलसिला तब शुरू हुआ जब 30 जुलाई को मुंबई में एक 14 साल के बच्चे ने एक इमारत से कूदकर जान दे दी। इसके बाद इंदौर में 7वीं क्लास में पढ़ने वाले एक लड़के ने 10 अगस्त को खुदकुशी करने से ठीक पहले बचा लिया गया। उसने अपनी स्कूल डायरी में पहले के 50 स्टेज के बारे में लिख रखा था। पश्चिम बंगाल में 12 अगस्त को 10वीं क्लास के एक बच्चे का शरीर पाया गया। उसका सिर प्लास्टिक में लिपटा हुआ था और उसके गले में एक रस्सी बंधी थी। अब हमीरपुर में एक छात्र फांसी के फंदे से लटका पाया गया।

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