Wednesday, July 24, 2024
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डॉक्टरों की टीम ने 11 घंटे में चार सौ टांके लगाकर जोड़ी कलाई…

SI News Today

लखनऊ: लखीमपुर निवासी किशोरी का केजीएमयू में 11 घटे ऑपरेशन चला। छह डॉक्टरों ने चार सौ माइक्रो टांके लगाकर बाएं हाथ से अलग हुई कलाई जहां जोड़ दिया, वहीं दाएं हाथ की रिपेय¨रग कर ब्लड सर्कुलेशन शुरू कर दिया। ऐसे में रात को ओटी में गए डॉक्टरों ने हथेली व कलाई की सुबह तक एक-एक नस व हड्डी जोड़ दीं।

बुधवार को लखीमपुर निवासी शिवानी (12) पर तलवार से प्रहार कर उसके हाथ काट दिए गए थे। दोपहर करीब ढाई बजे हुए हमले में उसका बायां हाथ कलाई से अलग हो गया और दाएं हाथ के आधे हिस्से की कलाई, अंगुली व हथेली कट गई थी। इसके अलावा सिर में भी करीब 10 सेमी लंबा घाव था। ऐसे में शिवानी की हालत गंभीर होने पर स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों ने केजीएमयू रेफर कर दिया। परिजन व पुलिस बुधवार रात नौ बजे शिवानी को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।

9:15 पर कैजुअल्टी में भर्ती, रक्त की जांच
ट्रॉमा सेंटर में गंभीर हालत में पहुंची शिवानी को कैजुअल्टी में भर्ती किया गया। वहीं इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टरों ने प्लास्टिक सर्जरी, न्यूरो सर्जरी व एनेस्थीसिया की टीम को अलर्ट किया। इस दौरान वायरल मार्कर व रक्त की जांच का सैंपल लेकर शिवानी को प्लास्टिक सर्जरी विभाग में शिफ्ट किया गया।

10:30 बजे प्लास्टिक सर्जरी की ओटी में शिफ्ट
चिकित्सकों ने जांच के बाद शिवानी को रात साढ़े दस बजे प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओटी में शिफ्ट किया। तब तक ट्रॉमा सेंटर से रक्त व वायरल मार्कर की रिपोर्ट आ गई। इसमें रक्त स्राव अधिक हो जाने से हीमोग्लोबिन की मात्रा कम पाई गई। ऐसे में डॉक्टरों ने दो यूनिट रक्त का बंदोबस्त करने का निर्देश दिया। डॉक्टरों ने बुधवार रात 11 बजे ऑपरेशन शुरू किया जो गुरुवार सुबह 10 बजे तक चला।

ऐसे कलाई से फिर जोड़ा पंजा
– एनेस्थेटिस्ट ने शिवानी को जनरल एनेस्थीसिया दी

– प्लास्टिक सर्जन ने पहले बाएं हाथ की सर्जरी का फैसला किया

– हाथ से अलग हुए पंजे व कलाई को पहले साफ किया गया। मृत व खिंचाव वाली कोशिकाओं, नसों को काटकर हटाया गया।

– इसके बाद पंजे व कलाई की पांच मेन मेटा कॉर्पल हड्डियां एक-एक कर जोड़ी गईं

– वहीं छोटी-छोटी तीन मेटा कॉर्पल खराब हड्डियां निकालकर आठ अन्य को जोड़ा गया

– इसके बाद पंजे में स्टील का ‘के वायर’ डाला गया और तारों से कलाई का जोड़ बनाया गया

– इसके बाद कलाई व पंजे के जोड़ ‘कैप्सूल’ को रिपेयर कर स्विच¨रग की

– दोनों हिस्से की 20 मांसपेशियों (टेंडन) को जोड़ा गया

– इसके बाद तीन संसेशन नर्व को आपस में जोड़ा गया

– कलाई की डॉरसल वेन व हथेली की वेसिलिक व सेफालिक वेन को जोड़कर अशुद्ध रक्त का परिसंचरण बहाल किया गया।

– हाथ की रेडियल ऑर्टरी, अल्ना आर्टरी और मीडियन आर्टरी को जोड़कर शुद्ध रक्त दोनों हिस्सों में दौड़ाया गया।

– नसें, धमनी व हड्डी जुड़ने के बाद स्किन की ऊपरी लेयर को टांके लगाकर पैचिंग कर दी।

दाएं हाथ की रिपेयरिंग, सिर में टांके
दाएं हाथ में किशोरी की कोहनी में चोट थीं। वहीं कलाई में फ्लेक्सन, टेंडन इंजरी, हथेली में नसें व नर्व कटी थीं। वहीं तीसरी, चौथी व पांचवीं अंगुली घायल थीं। इसमें अंगुलियों व हथेली को रिपेयर कर दिया गया, जबकि मेटा कार्पल हड्डी व टेंडन को रक्त का प्रवाह कम होने से फिलहाल रिपे¨रग नहीं की गई। वहीं सिर में भी टांके लगाए गए।

बोले डॉक्टर, 72 घंटे अहम
ऑपरेशन प्लास्टिक सर्जन डॉ. बृजेश कुमार मिश्रा के नेतृत्व में टीम ने किया। इसमें विभाग के डॉ. गुरुप्रसाद, डॉ. नवनीत व एनेस्थीसिया की डॉ. रिचा, डॉ. नेहा शामिल रहीं। वहीं सिर में टांके न्यूरो सर्जन ने लगाए। डॉ. बृजेश कुमार मिश्रा ने बताया कि 11 घंटे चले ऑपरेशन में माइक्रो नाइन-जीरो, टेन-जीरो के करीब 400 टांके लगाए गए हैं। किशोरी को दो यूनिट ब्लड चढ़ाया गया है। अभी उसे आइसीयू में शिफ्ट कर दिया गया है। रक्तस्राव व इंजरी अधिक होने से उसके लिए 72 घंटे अहम है।

समय से पहुंचती तो बेहतर आते रिजल्ट
डॉ. बृजेश के मुताबिक हाथ के मूवमेंट के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है। दरअसल कटे हुए हाथ की छह घंटे के अंदर सर्जरी शुरू हो जानी चाहिए। कारण, कटे हुए अंग में खून का दौरान बंद हो जाता है। धीरे-धीरे कटे अंग में कोशिकाएं मृत होने लगती हैं। ऐसे में रिकवरी में मुश्किल होती है। इस मरीज के साथ ढाई बजे दिन में घटना हुई और परिजन गोल्डन आवर में नहीं पहुंच सके, फिलहाल अभी उम्मीद कायम है।

दुर्घटना हो तो ऐसे रखें कटे अंग
– सबसे पहले साफ पानी से अंग को धोएं, रगड़े नहीं

– साफ रुई में पानी लेकर या नार्मल सेलाइन से सफाई करें

– इसके बाद साफ पॉलीथिन के बैग में रखें

– पॉलीथिन बैग को बर्फ से भरी हुई दूसरी पॉलीथिन या फिर कंटेनर में रखें

– कटे हुए अंग को सीधे बर्फ में रखने से बचें

– केजीएमयू पहुंचने से पहले हेल्पलाइन नंबर 9415200444 पर सूचना दे दें

– सूचना मिलने से प्लास्टिक सर्जरी की टीम अलर्ट हो जाएगी

– जितनी जल्द मरीज व कटे अंग को सुरक्षित लेकर अस्पताल पहुंचेंगे, रीइंप्लांट में उतना ही बेहतर रिजल्ट आएगा।

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