Wednesday, July 24, 2024
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पटना में होगी विपक्ष की ‘देश बचाओ, भाजपा भगाओ’ रैली…

SI News Today

लखनऊ: रविवार को पटना में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष लालू यादव की अगुवाई में ‘देश बचाओ, भाजपा भगाओ’ रैली होगी। इसमें यूपी से सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव और उपाध्यक्ष किरनमय नंदा दोनों शामिल होंगे, जबकि राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) की तरफ से जयंत चौधरी हिस्सा लेंगे। वहीं, कांग्रेस की तरफ से गुलाम नबी आजाद भी शामिल होंगे। बता दें, अभी पटना में कोई महागठबंधन नहीं होने जा रहा है। यह सिर्फ एक रैली है, जिसके जरिए विपक्षी एकता के प्रयास शुरू होने का संदेश देने की कोश‍िश कर रहा है। इस रैली का यूपी की राजनीति में तुरंत कोई खास असर नहीं दिखने जा रहा है।

एंटी भाजपा समर्थकों को सिर्फ मिलेगा मैसेज
-एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस रैली के जरिये विपक्षी पार्टियां यह मैसेज देना चाहती हैं कि अब भाजपा के खिलाफ कई दूसरी पार्टियां देश भर में लामबंद हो रही हैं।

-किसी हद तक विपक्ष अपने समर्थकों को यह मैसेज दे देगा भी, लेकिन इसका तुरंत में कोई असर देखने को नहीं मिलेगा। रैली विपक्ष समर्थकों को एक दिन की खुशी भर दे सकती है।

अखिलेश को हो सकता है फायदा
-अखिलेश यादव उस समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष हैं, जो मुख्य रूप से पिछड़ों और मुसलमानों की राजनीति करती है।

-चूंकि रैली पटना में है तो बिहार की सीमा से जुड़े यूपी के जिलों में उसका इफेक्ट भी देखने को मिलेगा और पिछड़ों का क्षत्रप बनने का सपा के पास मौका होगा।

-यह रैली यूपी के लिहाज से अखिलेश के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म की तरह है, जहां पर वह अपनी बात दमदारी से रह सकते हैं और सपा का वोट बैंक सहेज सकते हैं।

-बिहार बॉर्डर से यूपी के चंदौली से कुशीनगर तक जिले जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन इलाकों के पिछड़ों में इस रैली के बहाने अखिलेश अपनी पैठ को 2019 तक मजबूत कर सकते हैं।

इस वजह से नहीं जाएंगी मायावती
-एक्सपर्ट्स कहते हैं कि महागठबंधन में सीटों को बंटवारे का बहाना बनाकर मायावती ने रैली में जाने से इनकार कर दिया। लेकिन इसकी असली वजह यह है कि उनकी पार्टी की इंटरनल रिपोर्ट के अनुसार रैली से मायावती को कोई खास फायदा नहीं होगा, ऊपर से भाजपा के साथ नाराजगी का खतरा बढ़ जाएगा।

-दरअसल, बसपा प्रमुख के भाई के विरूद्ध सीबीआई एक जांच कर रही है, ऐसे में अभी वह भाजपा से सीधी नाराजगी नहीं लेना चाहेंगी।

-इसके उलट यूपी के दोनों क्षत्रपों मायावती और अखिलेश एक मंच पर आने से उनके परम्परागत मतदाताओं में भी असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।

मुलायम के बयान का माना जा रहा ये संदेश
-हाल के दिनों में गठबंधन की राजनीति का विरोध करने वाले और सार्वजनिक मंचों पर अखिलेश यादव से दूरी बनाकर चल रहे मुलायम सिंह ने शनिवार को लखनऊ के बख्शी का तालाब में सपा के संस्थापक सदस्य भगवती सिंह के जन्मदिन समारोह में भी सपा को मजबूत करने के लिए एकजुट होने का संदेश दिया।

-इस संदेश के भी सियासी निहितार्थ हैं। माना जा रहा है कि मायावती की पार्टी को पहले से ही यह अंदेशा रहा है कि मुलायम अपने बेटे के साथ ही खड़े होंगे।

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