Monday, July 22, 2024
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लखनऊ: पागल हो गई थी मेजर की बेटी-मांगती थी भीख, जानिए

SI News Today

लखनऊ: पैरेंट्स की डेथ के बाद 12 साल तक घर में खुद कैद रखने वाली और लखनऊ की सड़कों पर भीख मांग कर खाने वाली मेजर की बेटी अंजना की हालत अब ठीक हो गई है। हालांकि उसके भाई अरुण का इलाज अब भी चल रहा है। दोनों ने सदमें के कारण अपना मानसिक संतुलन खो दिया था, लेकिन इलाज के बाद अब दोनों की मेमोरी वापस आने लगी है। इसे देखते हुए आर्मी ने अंजना को अपने यहां CSD कैंटीन में नौकरी दी है।

22 साल की उम्र में उठ गया था पैरेंट्स का साया
– अंजना के मुताबिक, लखनऊ के इंदिरा नगर में शालीमार चौराहे के पास उनका अपना घर है। वहीं पर वो पहले तीनों भाई बहनों और मम्मी-पापा के साथ रहती थीं।

– तीनों में वो दूसरे नंबर पर थी। 2004 में मम्मी-पापा की डेथ एक रोड एक्सीडेंट में हुई थी। उस टाइम अंजना 22 साल की थीं। उसने लखनऊ यूनिवर्सिटी में एमए फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिया था। पैरेंट्स की डेथ के बाद पढ़ाई छूट गई।

सदमा लगने से बड़ी बहन की भी हो गई डेथ, फिर 12 साल कैद रहे वीरान घर में
– वो बताती है- मम्मी-पापा की डेथ की खबर सुनकर उस रात तीनों भाई-बहन बहुत रोए थे। बड़ी बहन उसे बहुत प्यार करती थी। वो मेरे लिए अलमारी में छिपाकर पारले जी बिस्कुट रखा करती थी।

– पैरेंट्स की डेथ से वो काफी दुखी थी। हमेशा कुछ न कुछ सोचती रहती थी। कुछ दिनों बाद ही सदमे से उसकी भी डेथ हो गई।

– अंजना बताती है- बहन की डेथ के बाद हमने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया। कुछ दिनों बाद घर की बिजली और पानी की सप्लाई कट गई। घर भी खंडहर में तब्दील हो गया। इसके बाद का उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं है।

– उनका इलाज कर रहे डॉ. सुरेश धपोला ने बताया, अगस्त 2016 में अंजना को एक दिन सड़कों पर रोते और भीख मांगते हुए देखा घर के आसपास के लोगों ने देखा।

– उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस भाई-बहन को 26 अगस्त 2016 को निर्वाण हॉस्पिटल ले आई। उसके बाद से दोनों यहीं हैं।

दोनों को है ये बीमारी
– डॉक्टर बताते हैं- ”अंजना-अरुण को सिजोफ्रेनिया नाम की बीमारी है। ये बीमारी किसी को भी हो सकती है। इस बीमारी के होने पर व्यक्ति की यादाश्त कमजोर हो जाती है। वो ठीक से किसी को भी पहचान नहीं पाता। हर असामान्य तरीके से हरकतें करना शुरू कर देता है, उसे भीड़-भाड़ में जाने से डर लगता है। वो किसी पर हमला भी कर सकता है। लेकिन यदि टाइम रहते इस बीमारी का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाए तो पेशेंट को ठीक किया जा सकता है। डॉ. धपोला ने बताया कि दोनों भाई बहन पहले से काफी ठीक हो चुके हैं।”

अंजना को आर्मी ने दी नौकरी
– दोनों को अलग-अलग सेंटरों में रखा गया है। अंजना काफी हद तक ठीक हो चुकी है। अरुण का इलाज अभी जारी है।

– आर्मी ने अंजना के बिहेवियर में इंप्रूवमेंट को देखते हुए उसे अपने यहां CSD कैंटीन में जॉब दिया है। उसने काम पर भी जाना शुरू कर दिया है।

– हॉस्पिटल की एक महिला स्टाफ हर रोज अपनी बाइक से उसे आर्मी कैंटीन ले जाती है और वापस लाती है।

अब जी रही ऐसी लाइफ
– अंजना को चलने-फिरने से लेकर खाने-पीने और बात करने की ट्रेनिंग दी जा रही है। उसे डांस भी सिखाया जाता है।

– हॉस्पिटल के स्टाफ उसके भाई अरुण को लाकर उससे मिलाने का काम करते हैं। वो अब अपने भाई के साथ घर जाना चाहती है।

– वो कहती है कि कभी भी शादी नहीं करेगी।

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