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मऊ खाद्य एवं रसद विभाग में भ्रष्ट लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल द्वारा लगाई जा रही भ्रष्टाचार की आग एवं चुप्पी साध कर जिलापूर्ति अधिकारी भी दे रहे गरीबों के निवाले की आहुति।

मऊ खाद्य एवं रसद विभाग में भ्रष्ट लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल द्वारा लगाई जा रही भ्रष्टाचार की आग एवं चुप्पी साध कर जिलापूर्ति अधिकारी भी दे रहे गरीबों के निवाले की आहुति।

मऊ खाद्य एवं रसद विभाग में भ्रष्ट लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल द्वारा लगाई जा रही भ्रष्टाचार की आग एवं चुप्पी साध कर जिलापूर्ति अधिकारी भी दे रहे गरीबों के निवाले की आहुति।

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उत्तर प्रदेश सरकार इस कोरोना महामारी में जहाँ एक तरफ “कोई भी व्यक्ति भूखा ना रहे” के लिए प्रतिबद्ध दिख रही है वहीं दूरी तरफ मऊ जनपद में खाद्य एवं रसद विभाग में बैठे खाद्यान्न माफिया सरकार के प्रतिबद्धता और उसकी साख को धूमिल करने में लगे हुए हैं। आपको ज्ञात है खाद्यान्न चोरी जिले में कोई नयी बात नहीं है पूर्व में भी जिले के खाद्य एवं रसद विभाग में माफियाओं का सिंडिकेट हावी रहा है, ये माफिया कोई और नहीं अपितु विभाग में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी ही हैं और यह हम नहीं, यह शासन द्वारा पिछले जिलापूर्ति अधिकारी पर की गई कार्यवाही व वर्तमान दबंग व भ्रष्ट लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल की रुकी हुई वेतन वृद्धि व लोकायुक्त की जाँच में इनकी चोरी का पकड़े जाने से ही इनकी भ्रष्टाचार की स्थिति स्पष्ट हो रही है।

आपको बता दें जनपद में खाद्य एवम सुरक्षा अधिनियम की धज्जियाँ बखूबी उड़ाई जा रहीं हैं,व जिले में कार्ड व यूनिट को प्रति महीने घटाने व बढ़ाने का गोरखधंधा खुले आम इस भ्रष्ट लिपिक के देख रेख में किया जा रहा है। जिले के नगरपालिका क्षेत्र की 132 दुकानों की जाँच करने का कार्य पिछले मार्च महीने से ही किया जा रहा है जिसमे केवल एक दर्जन दुकानों की ही जाँच अभी तक हुई है। जांच में प्राप्त फर्जी यूनिटों से ही पता चलता है की किस प्रकार आधारऑथेंटिकेशन के जरिये दूसरे राज्यों की फर्जी यूनिटों से जिले में सरकार को लाखों का चूना लगाकर गरीबों का निवाला छीना जा रहा है। इस जाँच में अब तक तीन दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज की गयी है। आपको जानकर यह हैरानी होगी कि आधारऑथेंटिकेशन के जरिये बढ़ी यूनिट के लिए विभाग कोटेदारों पर ही कार्यवाही कर अपना पल्ला झाड़ लेता है लेकिन विभाग में बैठे धीरज कुमार अग्रवाल जैसे भ्रष्ट व दबंग लिपिक पर हाथ डालने का साहस नहीं कर पाता है।

हमारे द्वारा जानकारी लेने पर विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि जिले में जिलापूर्ति कार्यलय को जिलापूर्ति अधिकारी हिमांशु द्विवेदी नहीं इस दबंग व भ्रष्ट लिपिक धीरज कुमार अग्रवाल द्वारा ही चलाया जा रहा है और जिलापूर्ति अधिकारी हिमांशु द्विवेदी मात्र काठ के उल्लू के भांति धृतराष्ट्र की भूमिका अदा कर के उसके काली करतूतों को नजरअंदाज कर सहमति देते प्रतीत होते हैं। उदाहरण के तौर पर आपको बता दें कि इस भ्रष्ट लिपिक ने मिट्टी तेल की उठान में जो कि मार्च में होनी थी ना कराकर मई में कराया है व मई में दाम घटने के बावजूद भी उसकी बिक्री पिछले दाम पर ही करवाई है और अतिरिक्त वसूला गया पैसा इस भ्रष्ट लिपिक द्वारा अपने हिमायतियों के साथ गटक लिया गया है। अब इसे जिलापूर्ति अधिकारी की मंशा कहें या इस दबंग लिपिक का खौफ की इस तरह खुले आम भ्रष्टाचार में लिप्त होने के बावजूद व लोकायुक्त की जाँच में दोषी पाए जाने के बाद भी इस भ्रष्टाचारी पर जिलापूर्ति अधिकारी हिमांशु द्विवेदी की कृपा बनी हुई है और आपको बता दें कि जब तक इस तरह का भ्रष्टाचारी लिपिक नगरपालिका क्षेत्र में मौजूद है विभाग में इसके हस्तक्षेप को रोकना असम्भव जान पड़ता है।

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