Monday, February 26, 2024
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मुंबईः बीवी के पंखा बंद करने पर शौहर ने दिया तीन तलाक

SI News Today

मुंबई में शुक्रवार को तीन तलाक का एक अनोखा मामला सामने आया है। एक जन शिकायत केंद्र में सुनवाई के दौरान पता लगा कि शौहर ने तीन साल पहले बीवी को कमरे का पंखा बंद करने के लिए तीन तलाक दे दिया था। शरियत आधारित कानून के जरिए इस प्रकार के विवादों में यह संस्था सुलह कराती है।

शौहर की शिकायत पर शुक्रवार को संस्था में सुनवाई हो रही थी, जिसमें उसने कहा गया था कि उसकी बीवी तीन तलाक देने के बावजूद घर से नहीं जा रही है। एक महीने पहले शौहर ने संस्था में यह शिकायत की थी और संस्था ने भी उसकी बीवी को इससी जुड़ी कई चिट्ठियां भेजी थीं। बॉम्बे सोशल सर्विस नामक एक एनजीओ के तहत काम करने वाला यह जन शिकायत केंद्र लोगों को मुफ्त में कानूनी मदद और शादीशुदा जोड़ों की सहायता करता है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी कुछ साल पहले इसके अच्छे कामों के लिए तारीफ की थी।

शुक्रवार रात 55 साल की अधेड़ महिला और उसकी बेटी को इस केंद्र की समन भेजा गया था। 65 वर्षीय उसके शौहर ने (पांच बच्चों का पिता) उसे अगस्त 2014 में तलाक दे दिया था। पीड़िता के मुताबिक “उन्होंने मुझसे कुछ मांगा था। चूंकि जिस कमरे में वह सो रहे थे, वहां पंखा बहुत आवाज कर रहा था। मैंने उसे बंद कर दिया था। मुझे लगा था कि वह पंखे की आवाज के कारण मुझे भी ठीक से नहीं सुन पा रहे थे। इस पर वह आगबबूला हो गए। पड़ोसी को बुलाकर उसे और मेरी एक बेटी को गवाह बनाया और तलाक दे दिया।

फिलहाल पीड़िता को घर से जाने के लिए कहा गया है। जबकि उसका शौहर दूसरे निकाह के बारे में सोच रहा है। बेटी के मुताबिक पिता पहले टैक्सी चलाते थे, लेकिन कुछ दिनों से वह बेरोज़गार हैं। हाजी अली दरगाह के मुफ्ती ने भी फतवा जारी करते हुए इस तीन तलाक को जायज़ ठहराया।

जन शिकायत केंद्र के चीफ ऑर्गनाइज़र अब्दुल रज्जाक मनियार ने बतााया कि अब हम जोड़े के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों ही पक्ष अलग रहना चाहते हैं, लकिन ऐसा उनमें से किसी के लिए भी ठीक नहीं होगा। हम चाहते हैं कि पीड़िता अपनी बेटी के साथ उसी घर में रहे। मैंने उस समुदाय के कुछ लोगों को भी बुलाया है, ताकि इस मसले पर बात हो सके। शुक्रवार को पीड़िता का शौहर बातचीत के लिए नहीं आया।

इतना ही नहीं, जन शिकायत केंद्र के पास सुलह के लिए एक और मामला भी है, जिसमें दो बहनों को उनके शौहरों (दोनों भाई) ने चिट्ठी के जरिए ‘तलाक बायीन’ दे दिया था। मनियार ने बताया कि इस मामले में पीड़िताएं अपने शौहरों के साथ नहीं रहना चाहती थीं। उनमें से एक तलाक के लिए इस बात पर राज़ी हुई कि महीने में उसे एक बारे बच्चों से मिलने दिया जाए। उसने एक बार दी जाने वाली रकम के रूप में 50 हजार रुपए भी स्वीकारे।

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