Friday, February 23, 2024
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सुप्रीम कोर्ट: तीन तलाक और हलाला पर होगी सुनवाई, बहुविवाह पर नहीं

SI News Today

सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के मुद्दे पर गुरुवार से सुनवाई शुरू हुई है। अलग-अलग धर्मों के पांच जजों की संवैधानिक पीठ  इसपर सुनवाई कर रही है। खंडपीठ ने कहा है कि वह देखेगी कि तीन तलाक धर्म का अभिन्न हिस्सा है या नहीं। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि इस मुद्दे में बहुविवाह पर सुनवाई नहीं की जाएगी। हालांकि हलाला पर सुनवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने गर्मियों की छुट्टी में इस संवेदनशील मुद्दे पर सुनवाई करने का फैसला लिया था। गुरुवार को छुट्टी का पहला दिन था। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मुद्दे को देखेगा कि क्या तीन तलाक धर्म का मूल हिस्सा है? हम इस मुद्दे को भी देखेंगे कि क्या तीन तलाक लागू किए जाने योग्य मूलभूत अधिकार का हिस्सा है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मुस्लिमों में बहुविवाह का मुद्दा उसकी विवेचना का हिस्सा नहीं हो सकता।

अलग-अलग धर्म के पांच जजों की पीठ:

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ में पांचो जज अलग-अलग धर्म के हैं।  इन जजों में मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कूरियन जोसेफ (ईसाई), आरएफ नारिमन (पारसी), यूयू ललित (हिंदू) और अब्दुल नजीर (मुस्लिम) हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज किसी भी मजहब के हों वो अदालत में फैसले सिर्फ और सिर्फ भारतीय संविधान की रोशनी में लेते हैं।

तीन तलाक से जुड़ी याचिका में छह याचिकाकर्ता हैं कुरान सुन्नत सोसाइटी, शायरा बानो, आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और आतिया साबरी। आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने सर्वोच्च अदालत से कहा था कि तीन तलाक इस्लाम का अंदरूनी मामला है और बोर्ड साल-डेढ़ साल मामले पर आम राय बना लेगा। हालांकि, शिया मुसलमानों के पर्सनल बोर्ड ने तीन तलाक की प्रथा का  विरोध किया है। करीब 100 मुस्लिम बुद्धिजीवियों और पेशेवरों ने खुला खत लिखकर तीन तलाक का विरोध करते हुए कहा था कि ये इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं है।

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