Thursday, February 22, 2024
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मुख्य सचिव: 2020 तक पूरी कराएं 21 हजार करोड़ की परियोजनाएं…

SI News Today

लखनऊ: मुख्य सचिव राजीव कुमार ने अमृत, नमामि गंगे, स्टेट सेक्टर और जायका सहित विभिन्न योजनाओं के तहत प्रस्तावित लगभग 21,000 करोड़ रुपये की अवशेष परियोजनाओं को समय से स्वीकृत कराकर वर्ष 2020 तक पूरा कराने का निर्देश दिया है।

वह रविवार को जल निगम के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अमृत योजना के तहत चयनित 61 शहरों में पेयजल पुनर्गठन योजना व सीवरेज परियोजनाओं की बची हुई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) 31 अक्टूबर तक प्रस्तुत करने के लिए कहा है। योजनाओं के बारे में प्राप्त हुईं विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को दो दिसंबर तक स्वीकृति के लिए शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

बैठक में उन्होंने एक वर्ष में अमृत योजना के तहत चयनित शहरों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगभग 1300 करोड़ रुपये के प्रस्ताव स्वीकृत कराकर आवश्यक कार्य पूरे कराने के लिए कहा। प्रदेश के 41 शहरों में स्थापित सीवरेज ट्रीटमेन्ट प्लांट को पूर्ण क्षमता के साथ चलाने के लिए सक्षम स्तर से निरंतर उनकी मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया।

उन्होंने शहरों में पेयजल और सीवर के घरेलू कनेक्शन समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। जेएनएनयूआरएम की लंबित परियोजनाएं समय से पूरी न होने पर उन्होंने विलम्ब के कारणों की जांच कराकर समय से काम न कराने वाले सम्बन्धित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने का निर्देश दिया।

परियोजनाओं को निर्धारित मानक व गुणवत्ता के साथ तय समय में पूरा नहीं कराने वाले संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही करने के लिए कहा। नमामि गंगे योजना के तहत मुरादाबाद, बरेली, बुलंदशहर के नालों की टैपिंग का कार्य, कानपुर, वाराणसी व मीरजापुर में एसटीपी के अपग्रेडेशन के कार्य के लिए भेजी गईं सात परियोजनाओं की डीपीआर को स्वीकृत कराने के लिए केंद्र सरकार से निरंतर अनुरोध करने पर जोर दिया। उन्होंने जल निगम को निर्माणाधीन परियेाजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित कराने के लिए थर्ड पार्टी से निरीक्षण कराने के लिए कहा जाये।

मुख्य सचिव ने जल निगम के प्रबंध निदेशक से तीन दिन के भीतर सभी परियोजनाओं की शुरुआत से लेकर उनके खत्म होने तक की समय सारिणी (टाइमलाइन) भी तलब की। कहा कि तय समय सारिणी से विचलन की छूट किसी दशा मे नहीं दी जाएगी। जल निगम की छवि को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने प्रबंध निदेशक को एक समिति गठित कर एक सप्ताह में प्राप्त सुझावों को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

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