Friday, April 19, 2024
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कप्तान मिताली राज से 13 गुना ज्यादा है विराट कोहली की सैलरी

SI News Today

भले ही बीसीसीआई विश्व में सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड हो मगर आप जब महिला और पुरुष क्रिकेट टीमों के खिलाड़ियों को मिलने वाली सैलरी जानेंगे तो आपको जमीन-आसमान का अंतर नजर आ जाएगा। साथ ही कुछ हद तक दुख भी होगा। एक ओर जहां बीसीसीआई की ओर से विराट कोहली को 2 करोड़ रुपए सालाना मिलते हैं वहीं दूसरी तरफ मिताली राज की सैलरी महज 15 लाख है। मतलब विराट कोहली से 13 गुना कम।

क्या है ग्रेड के हिसाब से सैलरी : भारतीय पुरुष टीम के खिलाड़ी 3 ग्रेड में विभाजित हैं। उनकी सैलरी में 2016-17 के दौरान दोगुना इजाफा भी किया गया है। ग्रेड A वालों को प्रतिवर्ष 2 करोड़, जबकि ग्रेड B वाले खिलाड़ियों को 1 करोड़ और ग्रेड C के क्रिकेटर्स को 50 लाख रुपए मिलते हैं।

वहीं दूसरी ओर बात अगर महिलाओं की करें तो इन्हें दो ग्रेड में रखा गया है। ग्रेड A की खिलाड़ियों को सालान 15 लाख, जबकि ग्रेड B में सभी खिलाड़ियों को 10-10 लाख रुपए दिए जाते हैं। इस हिसाब से ग्रेड ए में 13 गुना और ग्रेड बी में 10 गुना अंतर है।

विराट कोहली : भारतीय पुरुष टीम के कप्तान विराट ने 189 वनडे मैचों में 30 बार नाबाद रहते हुए 91.07 की स्ट्राइक के साथ 8257 रन बना चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 43 अर्धशतक समेत 28 शतक जड़े हैं। वहीं बात अगर टेस्ट की करें तो 57 मैचों की 97 पारियों में कोहली 55.81 की स्ट्राइक के साथ 4497 रन बना चुके हैं। इस दौरान कोहली ने 16 शतक और 14 अर्धशतक जड़े। इस शानदार बल्लेबाज ने भारत की ओर से 49 टी20 मैच भी खेले हैं, जिसमें 90 के सर्वाधिक स्कोर के साथ उन्होंने 1749 रन बनाए हैं।

मिताली राज : भारतीय महिला टीम की कप्तान मिताली ने लगातार 7 अर्धशतक जड़कर रिकॉर्ड कायम किया है। इस खिलाड़ी ने 182 वनडे मैचों की 163 पारियों में 47 बार नबाद रहते हुए 5959 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 114 (नाबाद) रहा। मिताली ने 51.37 की औसत से 48 अर्धशतक और 5 शतक जड़े हैं। मिताली महिला क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने के मामले में महज 34 रन ही पीछे हैं। उम्मीद है कि इस वर्ल्ड कप वह ये रिकॉर्ड भी तोड़ देंगी। इसके अलावा 10 टेस्ट मैचों में उन्होंने 663 रन बनाए हैं। वहीं बात अगर टी20 की करें तो 63 मैचों में मिताली 1708 रन बना चुकी हैं।

सैलरी अंतर में क्या है मुख्य वजह : दरअसल दोनों टीमों के बीच सैलरी का इतना बड़ा अंतर मैच के प्रसारण के दौरान मिलने वाले विज्ञापन पर निर्भर करता है। पुरुष टीमों के मैचों के दौरान विज्ञापनों की भरमार रहती है, जबकि महिलाओं के मैचों के वक्त आलम ये रहता है कि कई ओवरों तक विज्ञापनों का नामोनिशान तक नहीं रहता। वहीं पुरुषों के मैच के दौरान स्टेडियम खचाखच भरा रहता है। वहीं महिलाओं के मैच के दौरान भीड़ काफी हद तक कम रहती है।

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