Wednesday, February 21, 2024
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इन पांच मोर्चों पर अब तक नाकाम रहे पीएम नरेंद्र मोदी

SI News Today

नरेंद्र मोदी सरकार के तीन साल पूरे हो गए हैं। 36 महीनों के दौरान मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी जैसे ऐतिहासिक फैसले लिए। कुछ हद तक ये फैसले सही भी ठहराए गए, लेकिन कुछ ऐसे मोर्चे भी रहे जिनमें मोदी सरकार नाकाम रही। कारण महंगाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी मुद्दों की तरह भाजपा के लिए इन तीन सालों में लव जिहाद, एंटी रोमियो स्क्वॉड, गोरक्षा, घर वापसी, राम मंदिर और हिंदू राष्ट्रवाद अहम रहे।

नई नौकरियों के सृजन परः भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के ‘लेबर ब्यूरो’ के आंकड़े बताते हैं कि नए रोजगार पैदा होने में 84 फीसद गिरावट आई। 2009-10 में आठ लाख 70 हजार नए लोगों को रोजगार मिला था। 2016 में यह सिर्फ एक लाख 35 हजार लोगों को मिल सका। नई नौकरियों का सृजन करने के सवाल पर भाजपा खुद स्वीकारती है कि पार्टी मैनिफेस्टो ने कभी भी प्रति साल एक करोड़ नौकरियां सृजित करने के आंकड़े नहीं दिए।

ब्लैक मनीः मोदी सरकार विदेश में जमा कालाधन 100 दिन में वापस लाने में भी नाकाम रही। मोदी कैबिनेट का पहला फैसला 27 मई 2014 को लिया गया था। नोटबंदी के फैसले के पीछे भी शुरुआत में यही कारण बताया गया था, जो बाद में कैशलेस सोसायटी घोषित किया गया। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज़ के चेयरमैन सुशील चंद्रा के अनुसार आयकर विभाग ने टैक्स चोरी और आय न घोषित करने वाले करीब एक लाख मामलों में जरूर शिकंजा कसा है, लेकिन कालेधन पर लगाम लगाने में सरकार विफल नजर आती है।

सांप्रदायिक हिंसा के मामलों में बढ़ोतरीः मोदी के तीन सालों के कार्यकाल के दौरान सांप्रदायिक माहौल भी बिगड़ा। गृह मंत्रायल के आंकड़ों के मुताबिक साल 2012 में हुए 668 ऐसी घटनाओं में 94 लोगों की जान गईं। जबकि कि 2117 लोग चोटिल हुए। वहीं, 2017 में इस प्रकार की कुल 703 घटनाएं सामने आईं, जिनमें 86 लोगों को जान गंवानी पड़ी। 2321 लोग इनमें घायल हुए। साल 2015 में राजधानी से सटे दादरी में घर में गोमांस रखने की सूचना पर मो.इखलाख की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी।

सुरक्षा का मामलाः राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर फेल। सीमा पर अतिक्रमण और सैनिक शहीद होने के मामले बढ़े हैं। नियंत्रण रेखा पर पाक की ओर से संघर्ष विराम के उल्लंघन की घटनाएं तीन साल में बढ़ीं। यूपीए कार्यकाल में 2011-14 के दौरान 36 महीनों में संघर्ष विराम के उल्लंघन के कारण 103 जवानों और 50 नागरिकों की जान गई थी। मोदी सरकार के दौरान बीते 36 महीनों में सीमा पर 198 भारतीय सैनिक और 91 नागरिक मारे गए। कश्मीर मे भी हालात कुछ ठीक नहीं है। वहां बीते साल हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद अमन-चैन नहीं है।

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