Saturday, May 25, 2024
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कानून प्रवर्तन एजंसियों ने 5400 करोड़ रुपए की ‘अघोषित आय’ का पता लगाया

SI News Today

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बीते नवंबर में नोटबंदी लागू होने से लेकर दस जनवरी तक कानून प्रवर्तन एजंसियों ने 5400 करोड़ रुपए की ‘अघोषित आय’ का पता लगाया है। सरकार ने नोटबंदी के बाद पुराने नोटों को ठिकाने लगाने के विभिन्न तरीके अपनाए जाने और ‘विभिन्न गड़बड़ियों’ का भी जिक्र किया, जिसमें सोना खरीदने के लिए पुराने नोटों का प्रयोग शामिल है। कानून प्रवर्तन एजंसियों द्वारा छापेमारी और बरामदगी की जानकारी देते हुए सरकार ने कहा कि आयकर विभाग ने आपरेशन क्लीन मनी शुरू किया। इसके तहत नौ नवंबर से 30 दिसंबर 2016 के बीच नकदी के ई-सत्यापन के लिए डेटा विश्लेषण शुरू किया गया। सुप्रीम कोर्ट में जमा किए गए अपने हलफनामे में वित्त मंत्रालय ने कहा कि नौ नवंबर 2016 से 10 जनवरी 2017 के बीच आयकर विभाग ने 1100 से ज्यादा छापे मारे और सर्वेक्षण किए। इस दौरान ‘बैंक खातों में जमा बड़ी राशि की संदिग्ध नकदी’ के सत्यापन के लिए 5100 से अधिक नोटिस जारी किए गए।

हलफनामे में कहा गया है, ‘छापे और अन्य कड़े कदम लागू करने के परिणामस्वरूप, आयकर विभाग तथा अन्य सरकारी एजंसियों ने 610 करोड़ रुपए से अधिक की नकदी और कीमती वस्तुएं जब्त कीं। इसमें 110 करोड़ रुपए की नई करंसी शामिल है। इन छापों में 54 सौ करोड़ रुपए से ज्यादा की अघोषित संपत्ति का पता लगाया गया।’ कुल 1100 छापों और सर्वेक्षणों में से 400 से अधिक मामले कानून के अनुरूप आगे की कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई को भेजे गए।  इस अभियान से करीब 18 लाख लोगों की आनलाइन सत्यापन के लिए पहचान हुई, जो करदाता प्रोफाइल के अनुरूप नजर नहीं आए। फिलहाल 8.38 लाख अलग अलग पैन, लोगों से 12 लाख से अधिक आनलाइन प्रतिक्रिया मिली हैं। हलफनामे में कहा गया कि अगर उचित स्पष्टीकरण दिया जाता है तो उचित विश्लेषण और जांच के बाद सत्यापन बंद किया जा रहा है। इसी तरह से जहां प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में धनराशि जमा की गई है, उसका भी सत्यापन बंद किया जा रहा है। करीब 18 लाख अति जोखिम वाले मामलों में से 3.78 लाख से अधिक का पता लगाया है। इनकी जांच की जा रही है।

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