Friday, June 14, 2024
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जानिए, क्यों मनाई जाती है नागपंचमी

SI News Today

देश के कुछ हिस्सों में आज(14 जुलाई) नागपंचमी मनाई जा रही है। आज के दिन कृष्ण पक्ष की नागपंचमी है, जिसे राजस्थान और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। बता दें, शुक्ल पक्ष की नागपंचमी 27 जुलाई को मनाई जाएगी। भविष्य पुराण के मुताबिक सावन महीने की शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की नागपंचमी नाग देवता को समर्पित है यही कारण है कि इसे नागपंचमी कहते हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को भगवान श्री कृष्ण ने वृंदावन में नाग को हराकर लोगों का जीवन बचा लिया था, कृष्ण भगवान ने सांप के फन पर नृत्य किया, जिसके बाद वो नथैया कहलाए।

मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की नागपंचमी के दिन व्रत भी रखा जाता है। व्रत के बारे में गरुड़ पुराण में लिखा है कि व्रत रखने वाले को अपने घर के मुख्य द्वार के दोनों ओर गोबर से नागों के चित्र बनाने चाहिए और मिट्टी या आटे के सांप बनाकर उन्हें अलग-अलग रंगों से सजाना चाहिए। सजाने के बाद फूल, खीर, दूध, दीप आदि से उनकी पूजा करें, क्योंकि नाग देवता को पंचम तिथि का स्वामी माना जाता है। पूजा के बाद भूने हुए चने और जौं को प्रसाद के रूप में बांट दें। इस दिन पूजा पाठ करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कहा जाता है कि इस दिन नाग देवता की पूजा करने से कुंडली का सर्प योग दूर होता है।

नागपंचमी के पीछे एक पौराणिक कथा भी है, जिसके मुताबिक इस दिन सृष्टि रचयिता ब्रह्मा जी ने अपनी कृपा से शेषनाग को अलंकृत किया था। पृथ्वी का भार धारण करने के बाद लोगों ने नाग देवता की पूजा करनी शुरू कर दी, तभी से ये परंपरा आज भी चली आ रही है।

कुछ पंड़ितों का कहना है कि हमारे पूर्वज सर्प के रूप में अवतरित होते हैं। यही कारण है कि इस दिन देश भर के मंदिरों में अनेक स्थानों पर नाग देवताओं की पूजा की जाती है। जिस लोगों के कुंडली में सर्प योग है, उन लोगों को इस दिन नाग देवता की पूजा करने की सलाह दी जाती है।

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