Sunday, April 14, 2024
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‘मुलायम को अध्यक्ष पद सौंपें, नहीं तो बनाऊंगा नया मोर्चा’-शिवपाल सिंह यादव

SI News Today

समाजवादी पार्टी में छिड़े संग्राम का भूत फिर से चढ़ गया है। अब सपा में वर्चस्व की जंग तीखी होती दिख रही है। एक तरफ अखिलेश और रामगोपाल यादव हैं जो शिवपाल खेमे पर हमला कर रहे हैं। दूसरी तरफ शिवपाल लगातार अखिलेश को उनके द्वारा किए गए वादे को याद दिलाते हुए एक माह के भीतर सेकुलर मोर्चा बनाने का दावा कर रहे हैं। प्रस्तावित मोर्चे का स्वरूप क्या होगा, इसकी पुष्टि नहीं की गई है। बुधवार को इटावा मुख्यालय पर स्थित सिंचाई विभाग के प्रशासनिक भवन में शिवपाल यादव ने पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि अगर अखिलेश नहीं माने तो समाजवादी पार्टी में दो फाड़ हो जाएंगे। शिवपाल ने अखिलेश यादव को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर एक महीने में मुलायम सिंह यादव को दोबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया जाता तो पार्टी में सेक्युलर मोर्चा बनेगा, जो सांप्रदायिक ताकतों के साथ मुकाबला करेगा। शिवपाल यही पर नहीं रुके, उन्होंने पार्टी के महासचिव अपने भाई प्रो.राम गोपाल का बिना नाम लिए उन पर जवाबी हमला करते हुए उन्हें शकुनि करार देते हुए कहा कि हम पार्टी का संविधान पढ़ें या न पढ़ें, लेकिन शकुनि को गीता जरूर पढ़नी चाहिए।

उन्होंने कहा कि इटावा में पुलिस मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है। निर्दाेष लोगों को पीटा जा रहा है और अपराधी थाना चला रहे हैं। पुलिस नहीं सुधरी तो मुख्यमंत्री से वह मिलेंगे। हम जानते हैं कि मुख्यमंत्री दृढ़ इच्छा शक्ति वाले हैं। अत्याचार उत्पीड़न और अन्याय किसी के साथ हो, हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। मुलायम के परिवार में सपा का अध्यक्ष पद मुलायम सिंह यादव बनाने को लेकर दो फाड़ हैं। अपर्णा यादव भी कह चुकी हैं कि मुलायम सिंह को अध्यक्ष पद लौटा दिया जाना चाहिए। उनके परिवार में मुलायम सिंह यादव, उनकी दूसरी पत्नी साधन यादव और छोटे बेटे प्रतीक यादव, बहू अपर्णा यादव और शिवपाल एक तरफ हैं जबकि रामगोपाल यादव परिवार के इस विवाद में शुरू से ही मुलायम और शिवपाल के खिलाफ अखिलेश के साथ खड़े हैं। मुलायम को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद हटवाने में भी रामगोपाल यादव का बड़ा रोल था । अध्यक्ष बनने के बाद अखिलेश यादव पार्टी में अब तक कई तरह के बदलाव कर चुके हैं। पहले सदस्यता अवधि तीन वर्ष की होती थी, अब संविधान में संशोधन के बाद इस अवधि को बढ़ाकर पांच वर्ष कर दिया गया है। पिछली बार समाजवादी पार्टी का सदस्यता अभियान 1 जुलाई 2014 से 30 सितंबर 2014 तक चला था, जिसमें 1 लाख 44 हजार सक्रिय सदस्य और 75 लाख प्रारंभिक सदस्य बने थे। इनकी अवधि 30 जून, 2017 को समाप्त हो रही है। इसी को ध्यान में रखकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सदस्यता अभियान फिर से शुरू किया है।

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