Monday, June 17, 2024
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राम मंदिर विवाद : दोनों पक्षों में बातचीत पर सहमति है या नहीं आज SC में अहम सुनवाई

SI News Today

राम जन्मभूमि विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है. बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी के रोज सुनवाई करने की मांग वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा. वहीं बीजेपी नेता और इस मामले में याचिकाकर्ता सुब्रह्मण्यम स्वामी आज कोर्ट को बताएंगे कि दोनों पक्ष आपसी सहमति से मुद्दे सुलझाने को तैयार हैं या नहीं?

पिछली तारीख में क्या कहा कोर्ट ने?

गौरतलब है कि 21 मार्च को हुई इस केस की पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की बेंच ने मामले से जुड़े पक्षकारों से कहा था कि आपसी सहमति से मसले का हल निकालने की कोशिश की जानी चाहिए. अदालत ने यह भी कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट के जज इस बातचीत में मध्यस्थता कर सकते हैं. अदालत ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को आज यानी 31 मार्च तक की समय सीमा दी थी. इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को आज अदालत में अपना पक्ष रखना है.

स्वामी की रोजाना सुनवाई की अपील से पक्षकार नाराज

 दरअसल, सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि राम मंदिर विवाद का मामला पिछले 6 साल से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को रोजाना सुनवाई कर जल्द फैसला सुनाना चाहिए. लेकिन इस मामले में एक मुख्य याचिकाकर्ता के बेटे ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखकर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा सभी संबंधित पक्षों को जानकारी दिए बिना मामले की तत्काल सुनवाई की मांग पर आपत्ति जताई है. इस केस में एक पक्षकार रहे दिवंगत मोहम्मद हाशिम अंसारी के बेटे ने शीर्ष अदालत के महासचिव को पत्र लिखकर कहा कि स्वामी बार-बार चीफ जस्टिस के सामने मामले का उल्लेख करते हैं, यहां तक कि उनके पिता की ओर से पेश वकील सहित ‘एडवोकेट ऑन रिकार्ड’ (एओआर) तक को जानकारी नहीं देते हैं.

पिछले साल जुलाई में हुआ पक्षकार का निधन

आपको बता दें कि अयोध्या विवाद में सबसे पुराने याचिकाकर्ताओं में से एक दिवंगत मोहम्मद हाशिम अंसारी का पिछले साल जुलाई में 95 वर्ष की उम्र में हृदय संबंधी बीमारियों से निधन हो गया था. वह इस मामले में फैजाबाद की दीवानी न्यायाधीश अदालत में वाद दायर करने वाले पहले व्यक्ति थे. अंसारी के बेटे इकबाल ने लेटर में कहा, ‘मीडिया में खबर है कि डॉक्टर सुब्रमण्यम स्वामी ने इस अदालत (चीफ जस्टिस) के सामने इसकी रोजाना सुनवाई के लिए 21 मार्च 2017 को मामले का उल्लेख किया था. यह कार्यवाही वास्तविक वाद से जुड़ी है और इनमें से किसी में भी डॉक्टर स्वामी पक्षकार नहीं हैं.’

अयोध्या मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला

आपको ये भी याद दिला दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 2010 में जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाते हुए जमीन को तीनों पक्षकारों में बांटने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने जमीन को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर बराबर बांटने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सभी पक्षकारों ने सुप्रीमकोर्ट में अपीलें दाखिल कर रखी हैं जो कि पिछले छह साल से लंबित हैं.

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