Tuesday, April 16, 2024
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हुर्रियत को आतंकी संगठन घोषित किया जाए, बैन किया जाए

SI News Today

विदेश राज्य मंत्री और पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वी. के. सिंह ने नईम खान जैसे हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नेताओं को आईएसआई का पिट्ठू बताते हुए इस अलगाववादी संगठन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का असली चेहरा दुनिया के सामने लाने की जनरल सिंह ने सराहना की. जनरल सिंह ने कहा कि कैमरे पर नईम खान को जो भी कहते सुना गया वो आंतकवाद नहीं तो और क्या है.

विदेश राज्य मंत्री के मुताबिक हुर्रियत के नेता सिर्फ अपने परिवारों का और अपनी जेबों का भला चाहते हैं. ‘आज तक’ के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में जनरल सिंह ने कहा कि हुर्रियत के नेताओं से किसी तरह की बातचीत नहीं होनी चाहिए, वहीं उन्होंने इस बात से भी सहमति जताई कि हुर्रियत को आतंकी संगठन घोषित करने के साथ इस पर बैन लगाने का वक्त आ गया है.

जनरल वी. के. सिंह के साथ बातचीत….

सवाल- ‘आज तक’ पर खास मेहमान पूर्व सेनाध्यक्ष और मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री जनरल वीके सिंह , आपका स्वागत है. हमने ‘ऑपरेशन हुर्रियत’ दिखाया. ‘ऑपरेशन हुर्रियत’ में हमने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस का असली चेहरा जो है वो जनता के सामने रखा. हुर्रियत के शीर्ष नेता ये मानते हुए कि कश्मीर को जलाने के लिए पैसा पाकिस्तान से आता है. और कश्मीर में जो भी आग लगती है वो हुर्रियत के लोग ही लगाते हैं. उनके कहे बिना आग नहीं लगती?
जवाब- आपको और आपके चैनल को बधाई देता हूं, सराहना करता हूं. आपने उस असली चेहरे को दिखा दिया जिसके बारे में लोग जानते थे लेकिन बोलने से कतराते थे. बहुत अच्छा किया आपने. और मेरा सुझाव है कि इन चीजों को लेकर प्रदेश की सरकार उन लोगों पर सख्त कार्रवाई करे जो कश्मीर के बच्चों को पढ़ने नहीं देना चाहते हैं. कश्मीर के सामान्य नागरिक का हित नहीं चाहते. जो ऐसे लोग हैं जो सिर्फ अपना घर भरना चाहते हैं. अपने रिश्तेदारों का भला चाहते हैं लेकिन सामान्य नागरिक को एक नर्क के अंदर धकेलना चाहते हैं.

सवाल- नईम खान, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रोविशिंयल प्रेसिडेंट कैमरे पर कैद हैं ये कहते हुए कि हमने स्कूल जलाए. अब बताइए ये अपने आप को कश्मीर के हिमायती कहते हैं लेकिन जहां पर बच्चे जाकर पढ़ते हैं, हुर्रियत का प्रेसीडेंट कह रहा है कि हमने जलाए ये स्कूल, हमारे बगैर ये स्कूल नहीं जलते.
जवाब- ये आईएसआई के पिट्ठू हैं. आईएसआई के इशारे पर चलते हैं. जो उनको बोला जाता है वो बोलते हैं, जो कहा जाता है वो करते हैं. उनसे पैसा लेते हैं. ऐसे लोगों को क्या कहेंगे आप?

सवाल- तो ये लोग खुले क्यों घूम रहे हैं. ना इनके खिलाफ अब तक कोई खास कार्रवाई हुई है. कल हमने स्टेट्स चैक किया. मसारत आलम प्रीवेंटिव डिटेंशन में हैं. इसके अलावा जितने बाकी लोग हैं, बिलाल लोन तो बाहर हैं, उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. सैयद अली शाह गिलानी जैसे लोग हाउस अरेस्ट में हैं. मतलब उन्हें दूध बादाम भी मिलता है. नौकर चाकर भी रहते हैं, एसी में मतलब आराम फरमा रहे हैं. क्या इनकी जगह तिहाड़ जेल नहीं है?
जवाब- इतने साल से आराम फरमा रहे हैं, इन्हें बहुत पहले जेल चले जाना चाहिए था. लेकिन कहीं ना कहीं हर सरकार ये कोशिश करती रही है कि शायद ये लोग जो लोगों को उकसा रहे हैं, शायद ये शांत हो जाएं. शायद ये लोगों को सही बातें बताएं. लेकिन जैसे आपके चैनल ने दिखाया उससे बिल्कुल साफ है, इन पर कार्रवाई बनती है.

सवाल- पर क्या कार्रवाई बनती है? आतंकवाद क्या है? ये ही नहीं कि आपने बंदूक उठाई है, कसाब की तरह गोली चलाई. अगर आपने पैसा इकट्ठा किया, अगर आपने लोगों को आइडियोलॉजिकली मोटिवेट किया, अगर आपने स्कूल जलाए, क्या ये आतंकवाद नहीं है. क्या आपके हिसाब से हुर्रियत को आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहिए?
जवाब- देखिए जिस तरह नईम ने कहा है कि पैसे लेकर उन्होंने स्कूल जलाए हैं. आतंकवाद और उसमें क्या फर्क है. उन पर प्रदेश सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए. और जब तक हम कार्रवाई नहीं करेंगे ये लोग सीधी लाइन पर नहीं आएंगे.

सवाल- कैसी कार्रवाई, क्या कार्रवाई करेंगे?
जवाब- देश के अंदर कानून है, कश्मीर में भी कानून है. ऐसे कैसे नहीं इन पर कार्रवाई होगी.और जो इनके हिमायती बनते हैं. खास कर कश्मीर में तो बहुत हिमायती हैं. अपना अपना उसमें फायदा उठा रहे हैं. जैसे कि इनका हिमायती बन जाऊंगा तो बार काउंसिल में बहुत ऊंचे पद पर आ जाऊंगा. या फलां जगह पर ऊंचे पद पर आ जाऊंगा. लोग बात सुनेंगे. इनका सहारा लेकर लोगों को डराया जा सकता है, पैसा बनाया जा सकता है आदि आदि.

सवाल- ये बेईमानी में भी बेईमानी करते हैं. आईएसआई से जो पूरा पैसा आता है वो खुद मान रहे हैं कैमरे पर कि उसमें से भी पूरा पैसा उपद्रव पर नहीं लगाते उसमें से भी अपना कट अपने पास रख लेते हैं. यानि बेईमानी में भी बेईमानी?
जवाब- उनका चरित्र ही ऐसा हो गया है, ये ना जाने क्या क्या करेंगे. पहले बच्चों से ग्रेनेड फिंकवाते थे. उन्हें 500-500 रुपए देते थे. लोग थे जब हमने उनसे कहा कि ये ग्रेनेड हमको दे दीजिए, 1000 रुपया हम से ले लीजिए. तो बंद हो गया. यही इनका हाल है. इनके मुंह इतने खुले हुए हैं कि जितना डाले जाओ, पता ही नहीं चलता कि कहां गया. और आईएसआई इसका फायदा उठा रही है.

सवाल- सीधा सवाल आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या हुर्रियत कॉन्फ्रेंस पर प्रतिबंध लगाने का वक्त आ गया है?
जवाब- आपने इनके बारे में जो दिखाया है, उसको लेकर बाकायदा इन पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. ऐसे लोग जो कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, उसमें शरीक हो रहे हैं, उसमें पैसा लगा रहे हैं. और उसको बढ़ाने के लिए जो स्कूल जला रहे हैं वो आतंकवादी हैं.

सवाल- आतंकवादी है, आप बड़ी बात कह रहे हैं. क्योंकि अब तक कश्मीर में इन्हें डॉयलॉग में स्टेक होल्डर के तौर पर देखा जाता रहा है. बार बार मोदी सरकार से पूछा जाता है कि आप इनसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं?
जवाब- इनकी असलियत कश्मीर में जो लोग रह चुके हैं वो सब जान चुके हैं. आम आदमी जो कश्मीर का सामान्य नागरिक है वो भी जानता है, लेकिन वो बेचारा दबा हुआ है. उसको डराया जाता है बंदूकधारी से, क्या करेगा बेचारा. हां जी ठीक है मैं भी चला जाता हूं. मुझको पैसे मिल रहे हैं मैं भी जाकर पत्थर फेंकता हूं. तो ये सब किसी बिनाह के ऊपर हो रहा है. एक बार मैंने पहले भी आपके साथ शायद इंटरव्यू में कहा था कि गिलानी जब चलते हैं तो उनके सामने 20-25 गुंडे चलते हैं, दुकानों को बंद करा दिया जाता है. फिर कैमरे पर दिखाया जाता है कि गिलानी जा रहे हैं, सब कुछ बंद है श्रीनगर में…ये गुंडागर्दी है.

सवाल- गुंडागर्दी है, आतंकवाद है?
जवाब- सब कुछ है.

सवाल- हमने दिखाया कि किस तरह से स्कूल जलाए जा रहे हैं. सीधे सीधे पाकिस्तान की शह पर हो रहा है. आप कह रहे हैं कि बैन कर दीजिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को. मगर ये तो आप की ही सरकार को करना है. आपने कहा कि पहले की सरकारें ऐसे करती थीं. अब स्थिति ये है कि पीडीपी की तो सरकार है लेकिन आप भी तो इसमें हिस्सेदार हैं.
जवाब- इसीलिए मैं कहता हूं. देश का कानून है. प्रदेश की सरकार को देश के कानून में साथ देना चाहिए. अगर देश के कानून में कोई अड़चन डालता है तो उसको ठीक करने के 100 तरीके हैं. कानूनी तरीके से उसको सॉर्ट आउट किया जाना चाहिए. आपको एक चीज और बताता हूं. ये किताब है बांग्लादेश बनने के बारे में जिसे आईएसआई ने लिखा था. और आईएसआई के डीजी ने अपने हस्ताक्षर के नीचे बांग्लादेश के लोगों को लिखा कि पाकिस्तान फौज ने कुछ नहीं किया. आपके यहां जो भी कुकृत्य हुए, जो भी लोग मारे गए वो या तो खुद मर गए, या भारतीयों ने उन्हें मार दिया या अपने ही लोगों ने मार दिया. पाकिस्तानी आर्मी तो वहां पर मरहम लगा रही थी. जो लोग इतना बड़ा झूठ बोल सकते हैं वो क्या कुछ नहीं कर सकते और उनकी राह पर चलने वाले, उनसे पैसा लेने वाले उनसे बड़े देशद्रोही इस देश में और कोई नहीं हो सकते.

सवाल- कैसे डील करना चाहिए भारत को पाकिस्तानी आर्मी और आईएसआई के साथ, क्योंकि अगर हुर्रियत को पैसा आ रहा है तो पाकिस्तान और आईएसआई से आ रहा है, दुबई के रास्ते, यूएई के रास्ते, कतर के रास्ते, सऊदी अरब से. पूरा उसने फंड एक्सप्लेन किया कि कैसे पैसा आ रहा है.
जवाब- अपनी सतर्कता बढ़ानी पड़ेगी. अगर उनके पास दिमाग है तो आपके पास भी दिमाग है. आपके लोग कल नासा से निकल जाएं तो नासा बंद हो जाएगा, इतना दिमाग तो है हमारे पास. अपना एक तंत्र बनाइए, इन चीजों को रोकना होगा.

सवाल- कैसे रोकेंगे?
जवाब- बहुत चीजें हैं. सब चीजें मैं आपके सामने नहीं बता सकता. चाहे इकॉनॉमिक एजेंसी हैं, चाहे इंटेलीजेंस एजेंसी हैं या शासकीय एजेंसी हैं उनको ये यकीन करना पड़ेगा कि इस तरह की चीज ना हो. कैसे रोका जा सकता है. कैसे नहीं रोका जा सकता. आप ये नहीं पता लगा सकते कि बाहर से पैसा आ रहा है. उसके दायरे के अंदर बहुत से लोग आते हैं.

सवाल- आप ये बताइए कि जब आप आर्मी चीफ भी थे तब भी हमने आप से हमने इंटरव्यू किया. कमोवेश आपने वहीं चीज कहीं जो अब आज तक ने अपने कैमरे पर ऑपरेशन हुर्रियत में दिखाई. इतने सालों में दूसरी सरकारों ने किया क्यों नहीं कुछ. ये तो हमें मालूम था, इंटेलीजेंस एजेंसी को तो पता ही था.
जवाब- दिक्कत ये होती है कि सरकारों में बहुत से एडवाइजर्स होते हैं. सबकी राय अलग अलग होती है. हर एक अलग एजेंसी से आता है. भावना सबकी ठीक है कि सब कुछ ठीक होना चाहिए. लेकिन वो अपनी अपनी बातों के अनुरूप सुझाव देते हैं. कोई कहेगा कि इनके साथ भी बात करनी चाहिए. लेकिन बात करते करते आपको पता चले कि ये तो किसी और के पिट्ठू हैं तो बात करने का फायदा क्या है.

सवाल- लेकिन ऐसे में तो अब भी शरद यादव जैसे लोग हैं, उनका हमने कल इंटरव्यू दिखाया, जो कह रहे हैं कि ‘आज तक’ का ऑपरेशन हवाबाजी है, इसमें कोई दम नहीं है, वो तो अब भी हुर्रियत से बात करने पर आमादा हैं.
जवाब- ये तो गिलानी भी कहते हैं कि बारामूला में कुछ नहीं हुआ. आठ दिन तक लूटपाट और रेप हुआ वहां पर, लेकिन वो कहते हैं कुछ नहीं हुआ ये तो हवाबाजी वाली बात कर रही है भारत सरकार. तो पॉलिटिक्स में मत जाइए. शरद यादव जी क्या कह रहे हैं मैं उस पर नहीं जाना चाहता. वरिष्ठ नेता हैं, क्या उनका कंपल्शन है मुझे नहीं पता.

सवाल- आप को लगता है कि कंपल्शन है?
जवाब- कंपल्शन का मतलब पॉलिटिकल कंपल्शन.

सवाल- वाकई देशद्रोहियों का, आतंकवादियों का साथ देना कुछ तो कंपल्शन ही होगा.
जवाब- हमें नहीं पता कि उन्होंने क्यों ऐसी बात कही. कैमरे पर चीज है. खुद नईम बोल रहा है किस्कूल जलाने के लिए पैसा लिया. उसमें शक की क्या बात है. आपने कोई नईम का पुतला तो नहीं बिठाया वहां पर या कोई आवाज तो नही बनाई. वो खुद मान रहा है. ऐसी चीज है तो उस पर विश्वास करना चाहिए और ऐसे लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए.

सवाल- आपने बहुत बड़ी हैडलाइन दी है. आपने बहुत स्पष्टता से कहा है जैसे कि अभी तक किसी को कहते नहीं सुना कि हुर्रियत कॉन्फ्रेंस पर फौरन कार्रवाई करने का वक्त आ गया है, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के जो नेता पकड़े गए हैं उन्हें आतंकवादी घोषित करने का वक्त आ गया है, हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को बैन करने का वक्त आ गया है, इनसे बातचीत का कोई मतलब नहीं. बड़ी बात हैं.
जवाब- ये आपके लिए तो कुछ कर ही नहीं रहे, सब अपने बच्चों के लिए, अपने परिवारों के लिए, सब अपनी जेब के लिए, उनसे क्या बात करोगे आप?

सवाल- क्या आपको विश्वास है कि सरकार करेगी, आप की ही सरकार है.
जवाब- सरकार हर तरीके से कोशिश करती है कि समस्याओं का हल निकले, उसके अंदर किस स्तर पर क्या करेगी कहना मुश्किल है. लेकिन मेरी व्यक्तिगत राय ये है कि हुर्रियत ने आज तक किसी भी सरकार का साथ नहीं दिया है. ना ही कश्मीरी आवाम का साथ दिया है. उन्होंने साथ दिया है तो सिर्फ अपने और अपने रिश्तेदारों का साथ दिया है. इस पर सोच-विचार का वक्त आ गया है.

सवाल- और अब आईएसआई के पिट्ठुओं को अपने कंधों पर बिठाने का वक्त खत्म हो गया है. जनरल वीके सिंह आपने बेबाकी से अपनी बात रखी इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद्!

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