Saturday, May 18, 2024
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गुजरात में UP, बिहार वालों को मार डालो के लग रहे नारे, घरों में घुस कर पीटे जा रहे उत्तर भारतीय

SI News Today

The sloganeering slogans of killing UP and Bihar people in Gujarat, North Indian being beaten into homes.

#NorthIndians  #Gujrat  

बीते एक हफ्ते से गुजरात में उत्तर भारतीयों पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। लोगों में इस कदर डर है कि कामगार गुजरात छोड़कर घर लौटने लगे हैं। बिहार, यूपी और एमपी आने वाली ट्रेन और बसें भरी हुई हैं। हर जगह डर और खौफ का माहौल है।

सोशल मीडिया पर भी खुले तौर पर उत्तर भारतीयों को गुजरात छोड़ने की धमकी दी जा रही है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर के रहने वाले गंगाराम बताते हैं कि, मैं अहमदाबाद में काम कर रहा हूं। रात को लगभग 25 से 30 बाइक सवार लोग आए और मुझे पीटा, गालियां दी। वो नारे लगा रहे थे कि यूपी वालों को मार डालो। मैंने किसी तरह एक दुकान में छिपकर जान बचाई। वहीं, कुबेरनगर में रह रहे उत्तर प्रदेश के रघुदास ने भी उसके साथियों पर हुए हमले का जिक्र करते हुए बताया कि, पास की बस्तियों से रात के समय गाड़ियों पर कुछ लोग सड़कों पर निकलते हैं और गुजराती में पहचान पूछते हैं। यदि आपने उन्हें हिंदी में जवाब दिया तो पिटाई शुरु कर देते हैं।

वहीं चांदलोडिया इलाके में भी इसी तरह की घटना कुछ दिन पहले सामने आई थी। यहां 23 वर्षीय ऑटोरिक्शा ड्राइवर केदारनाथ जो मूल रूप से यूपी के सुलतानपुर का रहने वाला है। उसने पुलिस को बताया कि करीब 25 लोगों ने चांदलोडिया पुल पर उस पर हमला कर दिया। उसने बताया कि नारे लगाते हुए भीड़ सब्जी के ठेले पलट रही थी और लोगों पर हमला कर रही थी। जब केदार ने भागने की कोशिश की तो उसे रोका गया, उसके रिक्शे की विंडशील्ड तोड़ दी गई और उसे पीटा गया। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि उत्तर भारतियों को राज्य से भगाने के पीछे वजह जमीन विवाद भी सामने आ रहा है। साबरमती रिवर फ्रंट के जेपी चौल और गोपालदास चौल में रह रहे 17 परिवार उत्तर भारतियों पर हुए हमले के बाद से फरार है।

दरअसल, यह जगह ठाकोर समाज के लोगों ने कुछ उत्तर भारत से आए मजदूरों को रहने के लिए दी थी, लेकिन कुछ समय बाद वो अपने गांव के लोगों को ले आए और देखते ही देखते पूरी बस्ती उनकी हो गई इसके बाद जब ठाकोर समाज के लोगों ने उन्हें चौल खाली करने कहा तो वो राजी नहीं हुए। जिसके बाद उन पर एक समाज ने हमला कर दिया। फिलहाल इस मामले को डीसीपी जयपाल सिंह राठौड़ ने अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से जांच करने के लिए कहा है।

बता दें कि साबरकांठा, गांधीनगर, अहमदाबाद, पाटन और मेहसाणा समेत 6 जिलों में हिंसा के 42 मामले दर्ज किए गए हैं। गुजरात के डीजीपी शिवानंद झा ने बताया कि अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उत्तर भारतीयों का कहना है कि उनके घरों और फैक्ट्रियों में हिंदीभाषियों को निशाना बनाया जा रहा है। मकान मालिक घर छोड़ने को कह रहे हैं।

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