Saturday, May 25, 2024
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LG के फैसले पर केजरीवाल बोले- ऑफिस छीन लें, सड़क से करेंगे काम

SI News Today

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल अनिल बैजल द्वारा राजधानी में आम आदमी पार्टी (आप) के दफ्तर का आवंटन रद्द किए जाने के फैसले को कानून के खिलाफ बताया है। शनिवार को उन्होंने कहा, ‘हम सच्चाई के रास्ते पर चल रहे हैं। हमने कोई गलत काम नहीं किया। ऑफिस छीन लें, हम सड़क से काम करेंगे।’

प्रेस कॉन्फ्रेंस में केजरीवाल ने कहा कि हम अंतिम सांस तक देश के लिए लड़ेंगे। जनता हमारे साथ है। लोग हमें ऑफिस के लिए जगह का ऑफर दे रहे हैं। दिल्ली में दफ्तर हमारा हक है। बीजेपी बुरी तरह से बौखला गई है। इसलिए यह सब कर रही है। 23 अप्रैल के चुनाव में जनता इन्हें (बीजेपी) को सबक सिखाएगी। एमसीडी चुनाव में बात सिर्फ दिल्ली सरकार की हो रही है।

बता दें कि शुक्रवार को दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के दफ्तर का आवंटन कैंसिल कर दिया। दिल्ली के 206 राउज एवेन्यू पर आम आदमी पार्टी को दफ्तर बनाने का अलॉटमेंट दिया गया था। पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह ने खबर की पुष्टि की है।

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शुंगलू कमेटी की रिपोर्ट में केजरीवाल सरकार के प्रशासनिक फैसलों में संविधान के नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई थी। रिपोर्ट में अरविंद केजरीवाल सरकार में हुई नियुक्तियों और विभिन्न आवंटनों को लेकर आपत्ति जताई गई थी। तीन सदस्यीय शुंगलू कमेटी ने 404 फाइलों की जांच के बाद कुल 101 पेज की रिपोर्ट तैयार की है।

कमेटी ने दिल्ली में मोहल्ला क्लीनिक के सलाहकार पद पर स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन की बेटी की नियुक्ति को असंवैधानिक ठहराया है। वहीं, जैन के ओएसडी पद पर निकुंज अग्रवाह की नियुक्ति को भी गलत बताया है।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष को नियुक्ति से पहले दे दिया बंगला

रिपोर्ट में कहा गया है कि निकुंज को उस पद पर बैठाया गया है, जो पहले मौजूद ही नहीं था. इस पद को बिना उप राज्यपाल की अनुमति बढ़ाया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, आप सरकार ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को भी उनकी नियुक्ति से पहले बंगला अलॉट कर दिया था, जबकि आप विधायक अखिलेश त्रिपाठी के नाम अनुचित तरीके से 5 बंगले आवंटित किए गए थे।

केजरीवाल सरकार पर मनमाने ढंग से रेवड़ियां बांटने का भी आरोप है। बता दें कि केजरीवाल को जमीन आवंटन से जुड़े अधिकार नहीं हैं। इसके लिए केजरीवाल को फाइल उपराज्यपाल को भेजनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 150 ऐसे फैसले हैं, जिनमें कैबिनेट एजेंडे को लेकर एलजी को कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई है।

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