Saturday, May 18, 2024
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पूर्व यूपी शिवसेना प्रेस‍िडेंट :- बाबरी ढांचा गिराने के लिए कारसेवकों को दी गई थी ट्रेनिंग

SI News Today

अयोध्या.विवादित बाबरी ढांचा केस के आरोपी और 1992 में यूपी शिवसेना के प्रेस‍िडेंट रहे पवन पांडे ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में बड़ा खुलासा क‍िया है। उन्होंने बताया क‍ि ढांचे को गिराना सिर्फ जनाक्रोश नहीं था। इसकी पहले से तैयारी थी। पहले से प्लान बना हुआ था, पहले से ट्रेनिंग कारसेवकों को दी गई थी। और सबसे बड़ी बात ये क‍ि लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती जैसे बड़े बीजेपी नेताओं को इसकी जानकारी थी। बता दें, यूपी के अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराया गया था। इस मामले में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती जैसे नेताओं पर आपराधिक केस चलाने का फैसला सुनाया था।महाराष्ट्र, एमपी, च‍ित्रकूट में कारसेवकों को दी गई थी ट्रेन‍िंग…
– पवन पांडे ने बताया, ”देखते ही देखते कारसेवकपुरम से योजना के तहत गुंबद को गिराने के लिए सारे औजार घटनास्थल तक पहुंचा दिए गए।”
– ”बाबरी मस्जिद के विध्वंस की अगर साजिश रची गई थी तो जाहिर है क‍ि उसकी स्ट्रैटजी भी बनी होगी। 6 दिसंबर 1992 को जो कुछ हुआ, उसकी तैयारी कई सालों से चल रही थी।”
– ”कारसेवकों को 1991 से लेकर 1992 तक ढांचे को गिराने की ट्रेनिंग दी गई। मुझे याद है क‍ि कारसेवकों को महाराष्ट्र, एमपी और यूपी में चित्रकूट के कामदगिरि पर्वत पर ट्रेनिंग दी गई थी।”
– ”राम मंदिर और कारसेवा को लेकर जितनी भी मीटिंग्स हुईं, उन सभी में मैं भी शामिल हुआ करता था। 1990 में हुई एक गुप्त मीटिंग में ये तय हो गया था कि जिस ढांचे को लेकर विवाद है, उसके साथ क्या करना है।
कौन हैं पवन पांडे?
– जिस समय अयोध्या आंदोलन चरम पर था, उस समय पवन पांडे यूपी शिवसेना के अध्यक्ष थे। 1986 में बाला साहेब ठाकरे के सामने पांडे ने शिवसेना की मेंबरश‍िप ली। बाल ठाकरे पवन पांडे को उद्धव और राज ठाकरे के बाद अपना तीसरा बेटा मानते थे।
– 1989 के अंत में लाल कृष्ण आडवाणी जब रामरथ लेकर चले, तो पवन पांडे इस आंदोलन में शामिल हो गए। इसी दौरान वे राम मंद‍िर आंदोलन के प्रमुख संत और तत्कालीन श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष रामचंद्र परमहंस के भी करीब आए।
– नवंबर 1990 में मुलायम सरकार के दौरान जिन हिंदू कारसेवकों को रोकने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाई, उनमें पवन पांडे बाल बाल बचे थे। पवन पांडे परमहंस के नेतृत्व में 17 बार जेल जा चुके हैं। बाबरी मस्जिद के विवादास्पद ढांचे को गिराने का जो केस इस समय चल रहा है, उसमें पवन मुख्य आरोपी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेताओं पर केस चलाने का सुनाया था फैसला
– बीते 18 अप्रैल को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, समेत बीजेपी के 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश चलाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की पिटीशन पर सुनाया था।
– कोर्ट ने ये भी कहा था क‍ि इस मामले में चल रहे दो अलग-अलग मामलों को एक कर दिया जाए और रायबरेली में चल रहे मामले की सुनवाई भी लखनऊ में की जाए। सुनवाई दो साल में खत्म हो, ये भी सुनिश्चित किया जाए।
पूरा घटनाक्रम ऐसा चला:
– दिसंबर 1992: दो एफआईआर दर्ज की गई थीं। पहली अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ। इन पर मस्जिद को ढहाने का केस दर्ज था। वहीं दूसरी एफआईआर आडवाणी, जोशी और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी। इन सभी पर बाबरी मस्जिद गिराने के लिए भड़काऊ स्पीच देने का आरोप था।
– अक्टूबर, 1993: सीबीआई ने आडवाणी और अन्य के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की थी।
– 4 मई, 2001, स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने आडवाणी, जोशी, उमा भारती, बाल ठाकरे और अन्य के खिलाफ आरोपों को हटा दिया था। कोर्ट ने टेक्निकल ग्राउंड का हवाला देते सभी को आरोपों से बरी कर दिया था।
– 2 नंवबर, 2004: सीबीआई ने सीबीआई कोर्ट के फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ में चुनौती दी थी। कोर्ट ने नोटिस जारी किया था।
– 20 , मई 2010: हाईकोर्ट ने अपील को खारिज कर दिया था। कहा था कि सीबीआई की रिवीजन पिटीशन में कोई आधार नहीं है।
– फरवरी, 2011: सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, सीबीआई को यह करने में करीब 8 महीने का वक्त लग गया।
– 6 मार्च, 2017:सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए बाबरी मस्जिद केस में बीजेपी नेताओं के खिलाफ आपराधिक आरोपों की समीक्षा की जा सकती है।
– 21 मार्च, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद को हल करने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि सभी पक्ष सहमति से इस मामले का हल निकाल सकते हैं।
– 6 अप्रैल, 2017:सुप्रीम कोर्ट ने डेडलाइन में केस की सुनवाई खत्म करने की बात कही और सीबीआई की पिटीशन पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
– 19 अप्रैल, 2017: सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी के 13 नेताओं पर साजिश का केस चलाने का आदेश दिया। साथ ही दोनों केस की सुनवाई एक ही जगह लखनऊ में कराने के आदेश दिए।

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