Tuesday, April 16, 2024
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रायबरेली हत्याकांड: यादव Vs ब्राह्मण नहीं, वर्चस्व की जंग में गई 5 की जान

SI News Today

लखनऊ.रायबरेली के ऊंचाहार में 26 जून को हुई दिल दहला देने वाली घटना में 5 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई थी। घटना को बढ़ा-चढ़ाकर जातीय संघर्ष के तौर पर दिखाया गया।

टीम मामले की तह तक जाने के लिए मौके पर भुसई का पुरवा और अप्टा गांव पहुंची तो वर्चस्व के बीच चुनावी रंजिश की बात निकलकर सामने आई। जहां इस हत्याकांड से आरोपियों के परिजन परेशान हैं तो वहीं मृतक की तरफ के बुजुर्ग नाना-नानी अब इंसाफ का इंतजार कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने नाना-नानी की सिक्युरिटी में तीन पुलिसकर्मियों को लगा दिया है। चुनावी रंजिश बनी हत्याकांड की वजह…

सबसे पहले भुसई का पुरवा गांव पहुंची, जहां मृतक रोहित शुक्ला के नाना-नानी रहते हैं। यहां लगभग 4 हजार स्क्वॉयर फीट में एक पक्का मकान बना है, जिसकी छत नहीं पड़ी हुई है।

– जब मृतक रोहित की बुजुर्ग नानी ईशा देवी से बात की तो उन्होंने कहा, ”सारी लड़ाई की जड़ ये घर ही है। मेरी 3 नतिनी हैं, जिनको कन्यादान में साढ़े 3-3 बीघा खेत दिया हुआ है। साढ़े 9 बीघा खेत हमने अपने लिए रखा हुआ है।”

– ”छोटी नतिनी सुभद्रा के पति देवेश का भाई रोहित साल भर से हमारे साथ रह रहा था। वो गांव से प्रधानी का चुनाव लड़ना चाहता था। इसीलिए वो कच्चा मकान तुड़वा कर पक्का घर बनवा रहा था। बस यही मकान लोगों की नजर में खटकने लगा।”

– वहीं, नाना शिव मूरत प्रसाद ने बताया, ”यादवों को डर था कि उनके पास से प्रधानी छूट जाएगी। उन लोगों ने कई बार धमकी भी दी, लेकिन रोहित अपने साथियों के साथ मस्त रहता था।”

– ”रोहित प्रतापगढ़ के देवारा गांव का रहने वाला था। वो वहां का प्रधान रह चुका था, लेकिन सामान्य सीट खत्म हो जाने के बाद उसने अपने करीबी को खड़ा कर दिया था। अब उसे उम्मीद थी कि अप्टा गांव में सामान्य सीट हो जाएगी। इसलिए वो लोगों से मिल-जुलकर अपनी जमीन तैयार कर रहा था। यहीं रहने के लिए वो मकान बनवा रहा था, जिससे दूसरा पक्ष खफा था।”

मैं रोऊं न, इसलिए नतिनी बात नहीं करती…
– ईशा देवी कहती हैं, ”मेरे दामाद और रोहित का संयुक्त परिवार प्रतापगढ़ में रहता है। इस कांड के बाद भी किसी ने मुझसे कोई शिकायत नहीं की, लेकिन रोहित की मां का रो-रोकर बुरा हाल है।”

– ”नतिनी मुझसे इसलिए नहीं बात करती है क्योंकि मैं फोन पर रोने लगती हूं। वो कहती है कि कहीं आप बेहोश हो गईं तो देखभाल कौन करेगा। ये (शिव मूरत) थोड़ा ऊंचा सुनते हैं और ज्यादा देख भी नहीं पाते हैं।”

– शिव मूरत कहते हैं, ”उस रात (26 जून) रोहित अपने दोस्तों के साथ बाहर होटल पर खाना खाकर घर आया था। इसके बाद उसके पास किसी का फोन आया और वह उठकर अपने दोस्तों के साथ गाड़ी से अप्टा चला गया।”

रोह‍ित मनरेगा के तहत मांग रहा था पैसे
जब भुसई का पुरवा से होते हुए अप्टा गांव पहुंची तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पूरे गांव को 50 से 60 पुलिसवालों ने घेर रखा था। डेढ़ हजार की आबादी वाले गांव में बूढ़े, बच्चे और महिलाएं दिखाई दे रहे थे।

– दरअसल, करीब 15 साल बाद अप्टा के यादव परिवार की बुजुर्ग रामश्री यादव के पास प्रधानी पहुंची है। प्रधानी का काम उनके तीनों बेटे राजा यादव, कृष्णा यादव और प्रदीप यादव संभालते हैं।

– वहीं, अप्टा गांव में ही रोहित अपनी राजनीतिक जमीन बनाने के लिए करीब एक साल से काम कर रहा था। रोहित को लगता था कि इस बार अप्टा गांव की सीट सामान्य हो जाएगी तो वो यहां से प्रधानी का चुनाव लड़कर जीत सकता है।

– रोहित के भाई देवेश के मुताबिक, ”यही बात यादव परिवार को अखर रही थी, जिसके चलते कई बार उसे धमकी भी दी गई।”

– उधर, आरोपी राजा यादव की पत्नी विजय लक्ष्मी बताती हैं, ”रोहित कई बार हमारे परिवार को धमका चुका था। वो अपनी जमीन पर एक तालाब बनवा रहा था। मनरेगा के तहत वह उसका पैसा (करीब साढ़े 3 लाख रुपए) मेरे पति से मांग रहा था। लेकिन इनका (पति राजा) कहना था कि इसके लिए कागजी कार्रवाई पूरी करनी होगी तभी भुगतान हो पाएगा। इसके बाद भी रोहित इस बात पर अड़ा था कि पैसा उसे दिया जाए।”

– ”तकरीबन रात 8.30 के आसपास रोहित घर पर पहुंचा। लड़ाई-झगड़े के बीच करीब 9 से 9.30 के बीच घटना हुई। जब गाड़ी पोल से टकराई तो उसमें आग लग गई। आग लगने से हल्ला मचा तो हमारे परिवार के लोग भी दौड़कर पहुंचे। इसके बाद उन्हीं पर आरोप लगा दिया गया।”

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