Sunday, April 21, 2024
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लखनऊ: डॉक्टर इलाज के लिए कर रहे मोलभाव

SI News Today

लखनऊ: अग्नि हादसे से बेपटरी हुई ट्रॉमा की चिकित्सकीय सेवाओं का लाभ उठाने को दलाल सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में परिसर से लेकर सड़क तक एंबुलेंस का जमावड़ा लग गया है। यहां निजी अस्पतालों के एजेंट खुलेआम मरीजों से इलाज का मोलभाव कर रहे हैं। वहीं जिम्मेदार अनजाने बने हुए हैं।

ट्रॉमा सेंटर में शनिवार को हुए हादसे के बाद दलालों ने डेरा डाल दिया है। यहां से एक सैकड़ा मरीज रोजाना वह इधर से उधर भेज रहे हैं। शनिवार रात और रविवार को जहां वेंटीलेटर के मरीजों को चुंगल में फंसाने पर जोर रहा। वहीं फुल फ्लैश में ओटी का संचालन न होने से सर्जरी केस पर दलालों ने गिद्ध दृष्टि लगा दी। दूर-दराज से आए मरीजों को वह तुंरत ऑपरेशन व सस्ता इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल ले जा रहे हैं। मंगलवार को दैनिक जागरण ने मामले की तहकीकात शुरू की तो कैमरे का फ्लैश चमकते ही परिसर से निजी एंबुलेंस गायब होने लगीं, मगर सड़क के बाहर लंबी कतारें शाम तक लगी दिखीं।

10 हजार में ठीक करा देंगे दिमागी बुखार

बलरामपुर अस्पताल से मंगलवार को रेफर की गई सीतापुर निवासी आशा (सात) को तेज बुखार था। डॉक्टरों ने दिमागी बुखार की आशंका जताई। कैजुअल्टी में कुछ देर इलाज के बाद आशा को निकाल दिया गया। पिता राजकुमार स्ट्रेचर पर बाहर लेकर आए ही थे कि ट्रॉमा के अंदर खड़ी एंबुलेंस से निकले दलाल रानू ने उन्हें घेर लिया। उसने परिजनों से बीमारी पूछी और ठाकुरगंज के निजी अस्पताल में 10 हजार में दिमागी बुखार ठीक कराने का झांसा देकर फंसा लिया।

बैक हेड इंजरी है, 50 हजार लगेगा

बाराबंकी निवासी प्रताप (35) गिरकर घायल हो गए थे। उनके सिर के पीछे चोट लगी थी। बेहोशी की हालत में परिजन उन्हें लेकर 10 बजे ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। यहां इलाज के बाद डेढ़ बजे बेहोशी की ही हालत में उन्हें निकाल दिया गया। रिश्तेदार बेचन लाल स्ट्रेचर से प्रताप को लेकर ट्रॉमा की लॉबी में आया। तभी मनोज नाम का युवक आ धमका। बेचन लाल से बोला तुम्हारा मरीज तो गंभीर है, इसे क्यों निकाल दिया। बेचन का उत्तर था कि डॉक्टरों ने कहा कि इसे अपने जनपद के जिला अस्पताल में भर्ती करा दो, यहां का इलाज हो गया है। वहीं युवक मनोज बोला अरे ये तो बेहोश है और सिर के पीछे चोट लगी है, इसका ऑपरेशन कराओ नहीं तो अंदर खून जम जाएगा। यही नहीं समयगत ऑपरेशन न होने पर मरीज की जान जा सकती है। यह सुनकर बेचनलाल ने इलाज के लिए अस्पताल पूछा, तो मुकेश बोला बैक हेड इंजरी है, इंदिरा नगर के एक अस्पताल में 50 हजार में मरीज का पूरा इलाज हो जाएगा।

आंत फटी तो 30 हजार होगा खर्च

हैदरगढ़ निवासी मो. इमरान को एब्डॉमिनल इंजरी हो गई थी। स्थानीय चिकित्सकों ने आंत फटने का संदेह जताकर ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। दो बजे परिजन मो. इमरान को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। वह स्ट्रेचर की तलाश कर ही रहे थे तभी राजन नाम का एक दलाल आया। उसने मुकीम से कहा ट्रॉमा में अग्नि हादसा हो गया है, यहां ऑपरेशन बंद चल रहे हैं। ऐसे में मरीज की जान बचाना है तो निजी अस्पताल में ले जाओ। यह सुनकर मुकीम घबरा गया। तो दलाल ले कहा घबराओ नहीं सिर्फ 30 हजार में ऑपरेशन हो जाएगा। उसने फैजाबाद रोड स्थित एक अस्पताल ले चलने का सुझाव दिया।

फ्रैक्चर 20 हजार में फिट

शाहजहांपुर निवासी सुभाष दुर्घटना में घायल हो गए थे। उनके बाएं पैर में फ्रैक्चर व हाथ में चोट थी। ढाई बजे भाई संजय लेकर उन्हें ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। उन्हें मरीज को अंदर ले जाने के लिए 20 मिनट तक स्ट्रेचर नहीं मिला। तभी दलाल पहुंच गया। उसने खुद का नाम सुहैल बताया और फ्रैक्चर का इलाज बिठौली के अस्पताल में 20 हजार में कराने को कहा। परिजनों के इंकार करने पर कहा कि ट्रॉमा में ऐसे ही पड़े रहोगे और निजी अस्पताल में तुरंत ऑपरेशन करवा देंगे।

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दो से पांच हजार का कमीशन

ट्रॉमा सेंटर में ही मौजूद एक एंबुलेंस संचालक ने बताया कि यहां से रोजाना करीब 100 मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती कराए जाते हैं। यहां सक्रिय हर दलाल को एक मरीज पर दो से पांच हजार रुपये निजी अस्पताल देता है। वहीं मेजर सर्जरी में कमीशन आठ हजार तक मिल जाता है। इस धंधे में कुछ ट्रॉमा के कर्मी भी संलिप्त हैं।

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