Saturday, April 13, 2024
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KGMU में आग हादसे के बाद नहीं जागे लखनऊ के पांच बड़े अस्पताल : रियलिटी चेक

SI News Today

लखनऊ! केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में आग लगने की घटना के बाद 24 घंटे का वक्त बीत चुका है। उस हादसे के बाद भी जिम्मेदारों की आंखें नहीं खुल पाई है। सरकारी अस्पतालों में आज भी फायर फाइटिंग सिस्टम के इंतजाम अधूरे है। ये हाल केवल सरकारी अस्पतालों का नहीं है,बल्कि सीएमओ ऑफिस का भी हाल वही है।

सिविल हॉस्पिटल, राम मनोहर हॉस्पिटल, बलरामपुर हॉस्पिटल, डफरिन हॉस्पिटल और ट्रॉमा सेंटर का रियल्टी चेक किया है।आगे जानिए रियल्टी चेक में क्या मिला

सीएमओ ऑफिस में लिफ्ट खराब
-सीएमओ ऑफिस में कैजुअल्टी से निपटने के पुख्ता इंतजाम नहीं किये गये है। सोमवार को रिएलिटी चेक में सीएमओ ऑफिस की लिफ्ट खराब पाई गई। लिफ्ट के बटन को कई बार दबाकर चेक किया गया, लेकिन लिफ्ट का दरवाजा ही नहीं खुला।

-उसके बाद सीढ़ियों से सेकेण्ड फ्लोर पर जाकर ये देखने को कोशिश की गई कि कहीं उपर से किसी ने लिफ्ट का दरवाजा बंद तो नहीं कर दिया है? लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं पाया गया।

-लिफ्ट का बटन दबाने के बाद भी लिफ्ट चालू नहीं हो पाई। वहीं फायर इंस्टीग्वशर डिवाइस दीवार के उपर टंगे होने चाहिए थे। वे एक कोने में धुल खाते नजर आए।
सीएमओ का पक्ष

-सीएमओ डॉ. जीएस वाजपेई के मुताबिक़, सीएमओ ऑफिस में आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम किये गये है। परेशान होने जैसी कोई बात नहीं है। लिफ्ट में कुछ टेक्निकल फॉल्ट आ गई है। जिस वजह से लिफ्ट काम नहीं कर रही है। उसकी रिपेयरिंग के लिए मैकेनिक को बोल दिया गया है, जल्द ही लिफ्ट की रिपेयरिंग का काम पूरा कराया जाएगा ।

इन अस्पतालों में नियम फॉलो नहीं होते
-राजधानी के ज्यादातर अस्पतालों में फायर सेफ्टी रूल्स को फॉलो नहीं किया जा रहा है। नियम के मुताबिक,फायर इंस्टीग्वशर डिवाइस पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट साफ शब्दों में लिखी होनी चाहिए,जबकि हॉस्पिटल्स इस रूल्स को फॉलो ही नहीं कर रहे हैं।

-बलरामपुर हॉस्पिटल का एक्स-रे और पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट, डफरिन हास्पिटल में ओपीडी बिल्डिंग, सिविल हास्पिटल के ओपीडी बिल्डिंग, सिल्वर जुबली हास्पिटल में ओपीडी बिल्डिंग और ट्रामा सेंटर में लिफ्ट के पास लगाये गये फायर इंस्टीग्वशर डिवाइस पर मैन्युफैक्चरिंग डेट तो लिखी है, लेकिन एक्सपायरी डेट का पता नहीं।

-वहीं इन हॉस्पिटलों में कुछ स्थानों पर ऐसे भी फायर इंस्टीग्वशर डिवाइस मिले,जिनके ऊपर न तो मैनुफैक्चरिंग डेट मिली और न ही एक्सपायरी डेट ।

केजीएमयू में शो पीस बने फायर फाइटिंग सिस्टम
-केजीएमयू में ओपीडी बिल्डिंग, ट्रॉमा सेंटर बिल्डिंग सहित कई अन्य स्थानों पर फायर फाइटिंग सिस्टम के इंतजाम अधूरे पाए गये।

-ट्रॉमा सेंटर के बाहर सेफ्टी बॉक्स अंदर से खाली मिला। पानी पंप के नॉब में जंग लगा पाया। एमएस ऑफिस बिल्डिंग में फायर इंस्टीग्वशर काफी दूरी पर लगे पाए गये। न्यू ओपीडी बिल्डिंग में भी कई फायर अलॉर्म काम नहीं कर रहे हैं।

केजीएमयू ने क्या कहा

-केजीएमयू के सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के मुताबिक़,केजीएमयू में फायर फाइटिंग सिस्टम का दोबारा से रिव्यू किया जा रहा है। जिन जगहों पर फायर इंस्टीग्वशर, फायर अलार्म और दूसरी डिवाइस खराब हो चुके है, उन्हें जल्द बदला जाएगा। ट्रॉमा सेंटर में आगजनी की घटना में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।

इन हॉस्पिटलों में फायर फाइटिंग पर खर्च हो चुके है इतने रूपये
-KGMU के न्यू ओपीडी, ट्रॉमा सेंटर, वीसी ऑफिस, सहित कुल 42 डिपार्टमेंट में फायर फाइटिंग सिस्टम के नाम पर 1 करोड़ रूपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन केजीएमयू को फुल प्रूव नहीं बनाया जा सका है।

-वीसी ऑफिस, रजिस्ट्रार ऑफिस, वॉयरोलोजी डिपार्टमेंट, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट, सर्जरी डिपार्टमेंट और क्वीन मेरी हॉस्पिटल में अब तक कई बार आग लगने की अलग- अलग घटनाएं सामने आ चुकी है।

-वहीं सिविल हास्पिटल और बलरामपुर में 5 लाख और लोहिया हास्पिटल में फायर फाइटिंग सिस्टम पर 10 लाख रूपये खर्च किये जा चुके है।

स्वास्थ्य विभाग ने क्या कहा
-डीजी हेल्थ डॉ. पदमाकर सिंह के मुताबिक केजीएमयू में आग लगने की घटना के बाद से राजधानी के सभी हॉस्पिटलों को आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश जारी किये गये है।

-इसके साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर अस्पतालों ने आदेश को नहीं माना, तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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