Saturday, February 24, 2024
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गुड की पहचान करने का ये सही तरीका-आपको कोई नहीं बताएगा

SI News Today

नमस्कार मित्रों एक बार फिर से आपका हमारी वेबसाइट में बहुत बहुत स्वागत है. तो जैसा कि आप जानते ही है कि इस वेबसाइट में आपको राजीव जी के घरेलू नुस्खे एवं औषधियां मिलती है. आज हम आपको राजीव जी की एक और औषधि के बारे में बताने जा रहे है, जिसका नाम है गुड.

आप बोलेंगे गुड और चीनी में क्या अंतर है. इन दोनों में बहुत अंतर है चीनी बनाने के लिए गन्ने के रस में 23 जहर (केमिकल) मिलाने पड़ते है, और ये सब वो जहर है जो शरीर के अंदर चले तो जाते है लेकिन बाहर नहीं निकल पाते. और गुड एक अकेला ऐसा है जो बिना किसी जहर के सीधे सीधे बनता है गन्ने के रस को गर्म करते जाओ, गुड बन जाता है. इसमे कुछ मिलाना नही पड़ता.  ज्यादा से ज्यादा उसमे दूध मिलाते है और कुछ नही मिलाना पड़ता.

गुड से भी अच्छी एक चीज़ है जो आप खा सकते हैं उसका नाम है काकवी. अगर आपने कभी गुड बनता देखा होगा तो आपको इसका भी पता होगा. ये काकवी गुड से भी अच्छी है, गुड तो अच्छा है ही लेकिन गुड से भी अच्छी अगर कोई चीज है तो ये काकवी ही है. एक काम कीजिए काकवी को बाल्टी में भरकर रखिये ये ख़राब नहीं होती, 1 साल 2 साल आराम से रख सकते हैं. काकवी का भाव भी लगभग गुड के बराबर ही है. अब आप या तो काकवी खाइये नहीं तो गुरु खाइए. अगर आपको काकवी मिलती है तो समझ लीजिए कि आप राजा हैं, अगर काकवी ना मिलकर गुड मिल रहा है तो छोटे राजा है.

अभी तक आप यही सोच रहे होंगे कि ये काकवी क्या होता है, आपके ये भी बता देते है. काकडी का मतलब गन्ने के रस को जब हम गर्म करना शुरू करते हैं तो गरम करने के करते-करते गुड बनने से पहले और उसका रस गर्म होने के बाद एक लिक्विड बनता है उसी लिक्विड को काकवी कहते है. जहां भी गुड बनता है वहां पर काकवी जरुर मिलेगी.

आप से मेरी एक छोटी सी विनती है कि अपने घर से यह चीनी निकाल दीजिए. चीनी ने पूरी दुनिया का सत्यानाश किया है. शुगर मील वालों का भी BP हाई है. राजीव भाई पूरे हिंदुस्तान में प्रवास करते थे, वो शुगर मील वालो से मिलते थे तो वो कहते थे कि राजीव भाई हम भी बहुत तकलीफ में है. जब से चीनी बनाना और खाना शुरू किया है, तब से शरीर की हालत ख़राब है. करोड़ों रुपए तो शुगर मिल लगाने में लगते हैं और करोड़ो गन्ने के रस को चीनी बनाने में लगते है. इससे अच्छा है बहुत सस्ते में गुड़ बनता है, प्रोसेस भी लम्बा नहीं है.  बहुत सस्ते में काकवी बनती है, सीधे गुड बनाकर बेचे, काकरी बनाकर बेचे.

राजीव भाई हमेसा बताते थे कि चीनी का प्रयोग बंद कर दे और उसके स्थान पर गुड का इस्तेमाल करे. इसके पीछे वो बहुत से कारण बताते थे जिसपर हमने पिछली पोस्ट में चर्चा की थी. राजीव भाई कहते थे कि चाय भी गुड की पिए उससे आपको फायदा होगा नुकसान नहीं. चाय से बहुत नुकसान होते है.

हमारे देश में हजारो सालो से गुड की ही चाय पी जाती थी, ये कुछ सालो में चीनी ने आकार सब का स्वास्थ्य बिगाड़ दिया है. हर घर में डायबटीज और आर्थराइटिस के मरीज मिलने लगे है. और भी बहुत गंभीर बिमारियों ने लोगो को घेर लिया है, इसमे चीनी का बहुत बड़ा योगदान है. जब राजीव भाई लोगो को गुड की चाय के बारे में बताते थे तो, कुछ लोगो का सवाल होता था कि अक्सर गुड की चाय बनाने के प्रयास में हमारी चाय फट जाती है. इस स्थिति से बचने के लिए हम क्या करे. इस सवाल के जवाब में राजीव भाई ने कहा कि उसी गुड की चाय फटती है, जिसमे केमिकल मिलाया जाता है.

गुड दो प्रकार का होता है. एक गुड केमिकल के द्वारा बनाया जाता है, इसे गुड की चाय हमेशा फट जाएगी.  दूसरे प्रकार के गुड में केमिकल नही मिलाये जाते, और ऐसा गुड दिखने में काला नजर आता है. इसके विपरीत अगर केमिकल वाले गुड की बात की जाये तो वह दिखने में एकदम पीला या सफेद होता है. इसे गुड की चाय हमेशा फटेगी. लेकिंन बिना केमिकल वाले गुड की चाय कभी भी नही फटेगी.

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