Sunday, April 14, 2024
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पाकिस्तान के बुजुर्ग की दिल को छू लेने वाली कहानी

SI News Today

आमतौर पर हर दूसरे दिन मानव क्रूरता की खबरें मीडिया की सुर्खियों में बनी रहती है। ऐसी खबरें ना सिर्फ इंसान की किसी जानवरी से तुलना करने के लिए काफी है बल्कि भविष्य के लिए भी बहुत डरावने संकेत देती हैं। ऐसी खबरों से साफ पता चलता है कि आज के युग में इंसान के अंदर दूसरे के प्रति स्नेह, प्रेम, दयालुता की कितनी कमी है। सड़कों पर तो तकरीबन रोज ऐसे नजारे देखने के लिए मिलते हैं जहां मदद की पुकार कर रहे शख्स की सैकड़ों की भीड़ भी मदद के लिए सामने आने से कतराती है। हालांकि इन दिनों पाकिस्तान की सोशल मीडिया में एक खबर छाई हुई है। जहां बारिश में खड़े एक बुजुर्ग शख्स की मदद के लिए एक युवा नौजवान आगे आए। बाद में बुजर्ग शख्स ने जब शख्स को अपनी परेशानी बताई जो इंसानियत को झकझोर देने के लिए ये काफी है। दरअसल पाकिस्तान में देर रात हो रही मूसलाधार बारिश में जहां हर कोई अपने घर में बैठा था वहीं एक बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे फूल बेचने के लिए खड़े थे। तभी वहां से गुजर रहे मुहम्मद उस्मान ने बुजुर्ग बाबा हमीद को देखा और अपनी कार रोककर डिनर के लिए अपने साथ ले गए।

जहां बातचीत में बाबा हमीद ने बताया कि वो अपनी बेटी की शादी के लिए फूल बेच रहे हैं। क्योंकि बेटी की शादी के लिए अभी भी पचास हजार पीकेआर (करीब तीस हजार रुपए) कम हैं। तब उस्मान ने कहा कि वो उनकी बेटी की शादी के लिए आर्थिक मदद करना चाहते हैं। जिसके बाद उस्मान ने दोस्त ओसामा बिन अहमद के साथ उन्हें रेस्टोरेंट भी ले गए जहां बुजुर्ग ने दोनों के साथ डिनर किया। 16 जुलाई को ओसामा ने बुजुर्ग से जुड़ी फेसबुक पोस्ट की जो एक दिन में पूरे पाकिस्तान में वायरल हो गई। जिसके बाद काफी लोग बाबा हमीद की मदद के लिए आगे आए और दो दिन में ही बेटी की शादी के लिए पैसों का इंतजाम हो गया। वहीं इंडियन एक्सप्रेस से बातची में अहमद ने बताया, ‘हम कोई संगठन नहीं चलाते। बस आम नागरिक की तरह समाज के लिए कुछ करते रहना चाहते हैं।’

ये लिखा फेसबुक पोस्ट में-
शुक्रवार रात करीब दो बजे बहुत तेज बारिश हो रही थी। हर कोई अपने घर में था। लेकिन एक बुजुर्ग शख्स खायाबान-ए-इत्तेहाद रोड पर खड़ा जासमीन के हारनुमा फूल बेचने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहा था। मैंने कुछ ही दूरी पर अपनी कार खड़ी की। लेकिन बुजुर्ग को इस हालत में देखकर तब मेरे दिमाग कुछ सवाल आए। अपने घर जाने की बजाय बारिश में खड़े होकर बुजुर्ग क्या कर रहे हैं? उस वक्त रात के शायद दो बज रहे थे। देर रात होने की वजह से बुजुर्ग के पास से भी कोई कार नहीं गुजर रही थी। शायद खराब मौसम या किसी और वजह से? लेकिन वो तब भी अपने फूलों को बेचने में व्यस्त थे। क्यों? बाद मैंने फैसला किया कि उनसे बातचीत करूं।

जिसके बाद मैं बुजुर्ग के पास गया और उनसे पूछा- खाना खाया बाबा? उन्होंने कहा नहीं। तब मैंने उनसे पूछा क्या वो मेरे साथ डिनर करेंगे? जिसपर उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा, हां, लेकिन कहां? मैंने कहा-आपके ठीक पीछे रेस्टोरेंट है। फेसबुक पोस्ट में पढ़िए पूरी बातचीत-

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