Friday, May 17, 2024
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।।इस्लाम एक शांति??।।

SI News Today

जो धारण करने योग्य हो उसे धर्म कहते हैं। कई मतों के अनुसार धर्म एक कानून भी है।इस्लाम एक एकेश्वरवादी धर्म है जिसमे केवल एक अल्लाह को मानने का मत है।विश्व के लगभग 25% हिस्सों में इस धर्म का प्रचलन और पवित्र पुस्तक कुरआन पढ़ी जाती है। इस्लाम मूल शब्द ‘सलाम’ से निकला है जिसका अर्थ है ‘शांति|’ इसका दूसरा अर्थ है अपनी इच्छाओं को अपने पालनहार अल्लाह ताला के हवाले कर देना| अतः इस्लाम शांति का धर्म है जो सर्वोच्च अल्लाह के सामने अपनी इच्छाओं को हवाले करने से प्राप्त होती है|इस्लाम धर्म के प्रचार को लेकर तमाम तरह की बातें होती हैं।विश्व पटल पर भी इसका प्रचार झंझट करके ही हुआ है। और भारत में भी इसका उदय मुहम्मद गौरी और महमूद गजनवी द्वारा फैलाया माना जाता है,जैसा की इतिहास पढने से लगता है।इस्लाम पर एक कटाक्ष होता आया है की यह तलवार के बल पर फैलाया गया धर्म है और इतिहास में अगर महमूद गजनवी और मुहम्मद गौरी को गाजी की उपाधि दी गयी तो हम क्या मानें? खैर इतिहास चाहे जो भी कहे हमे सब कुछ भूल कर वर्तमान में जीना है,समस्या वर्तमान में भी आती हैं।जिस धर्म की नींव शांति फैलाने के लिए पड़ी उस धर्म से सम्बन्ध रखने वाले कट्टरपंथी मुस्लिम समुदाय के लोग शरिया कानून के नाम पर आज के आधुनिक समाज में आज के विकसित परिवेश में लोगों को डराते और मारते हैं इसका सीधा उदाहरण मलाला युसुफ्जई और पाकिस्तान में अभी हाल ही में मारे गए विश्व प्रख्यात अमज़द सबरी कव्वाल को देख कर मिलता है।हाल ही में एक शब्द कानो में पड़ा गजवा हिन्द पड़ताल की तो पता चला की सारे काफिरों को मार कर पूरे भारत में हर धर्म को ख़त्म करके शान्ति स्थापित करना।इस्लाम की धर्म पुस्तकों में लिखा है की शांति के लिए बलप्रयोग किया जा सकता है। लेकिन इसको कई तरह के जुनूनी मुल्लों ने अपनी तरह और अपनी आवश्यकता अनुसार समझाया है। कब तक धर्म का विचार आवश्यकता अनुसार मौसम की तरह बदला जायेगा।कहने और सुनने में कचोटता तो है लेकिन सातवीं सदी के नियम आज हमारे रहन सहन को प्रभावित तो करेंगे ही और समस्याएं भी आएँगी। आज के इस वैज्ञानिक माहौल में पूरे विश्व में बोको हरम और तालिबान जैसे आतंकी सगठन भी हैं जो अपने अपने इलाके में शरिया कानून को ना मानने वाले लोगों को प्रताड़ित करते हैं। जितना विवाद इस्लाम को लेकर विश्व में हैं उतना शायद किसी विषय पर नहीं।वैसे तो कहने को आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता।लेकिन याकूब मेनन,बुरहान वानी और अफज़ल गुरु के मारे जाने पर भारत में शोक सभाएं होती देखी गयीं हैं।बात इस्लामिक आतंकवाद पर आती है तो लोग कहते हैं की यह अमेरिका और रूस की देन है,तो इसमें कमी किसमे मानी जाये।आज का मुसलमान शिक्षित भी है और विज्ञान समझता भी है और समझा भी सकता है तो क्या जरूरत है उस शाही इमाम को दिल्ली से ये बताने की,कि आप वोट वहीँ दो जहाँ उनके धर्मगुरु कह रहे हैं। क्या आज का मुसलमान अपना अच्छा बुरा नहीं सोच सकता या ये नहीं समझ सकता की कौन सी सरकार उसका भला चाहेगी।70 साल हो गए क्यूँ आज भी मुसलमान भारत में एक वोट बैंक बन कर रह गया। एक शांति प्रिय धर्म के गुरु जब टीवी पर तीन तलाक के मुद्दे पर बोलने आतें हैं तो गज़ब की उग्रता प्रदर्शित करतें हैं। शरियत में तो ये भी लिखा है जिस देश में रहो वहाँ के कानून में विश्वास रखो।तो तीन तलाक के मामले में ऐसा क्यूँ नहीं दिखता। खैर तीन तलाक का जो भी हो बस उम्मीद यही है की उस औरत का दर्द भी अल्लाह समझे जो अपने 3 बच्चों के साथ तीन तलाक का दर्द झेल रही है। इस्लाम के नाम पर हो रहे कॉर्पोरेट जगत का शोषण जो की ईराक सीरिया और पकिस्तान जैसे इस्लामिक देश में देखने को मिल रहा है उसको भी मुस्लिम भाइयों को समझना चाहिए। और अपने को देवदूत बताने वाले शांतिदूत अबू बकर अल बगदादी जैसों की असलियत को नौजवान मुस्लिम युवाओं को भी बताना चाहिए। क्यूंकि जो शांति ये स्थापित करना चाहतें हैं वो कब्रिस्तान और शमशान में ही महसूस होती है।और शांति का तात्पर्य इस्लाम में क्या है यह ना तो इतिहास में पता चला और न वर्तमान में!!

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Pushpendra Pratap singh

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