Friday, June 14, 2024
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डायबिटीज बीमारी में क्या क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए

SI News Today

डायबिटीज एक गंभीर रोग है जिसका इलाज बहुत लम्बा चलता है. आज कल बहुत सारे लोगो को डायबिटीज की तकलीफ होती है. राजीव जी ने डायबिटीज के बारे में बहोत विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि हम जो कुछ भी खाते हैं उसमे शुगर या जिसे गुलकोज भी कहते है वो होता है. भोजन के अंदर यह शरीर को सबसे जल्दी और सबसे आसानी से ऊर्जा देने वाला तत्व है. आप कुछ भी खाएंगे, शरीर उसका पाचन करेगा और पाचन करने के बाद वह आपके रक्त में जाएगा. रक्त के अंदर बहुत सारे सेल्स होते हैं जिनको हम कोशिकाएं या ब्लड सेल्स कहते है. ये सेल्स की बनावट आपके घर के दरवाजे जैसी होती है. दरवाजा खुला नहीं है तो घंटी बजा के प्रवेश किया जाता है. हमारे रक्त के अंदर जो कोशिकाएं होती हैं, वह ऐसे ही दरवाजे जैसी होती है. सामान्य रूप से रक्त कोशिकाओं का दरवाजा बंद रहता है.

हमारे खाने के अंदर जो कुछ भी मीठा तत्व है वो रक्त के अंदर आता है और कोशिकाओं के अंदर आने के लिए यह दरवाजे पर खड़ा हो जाता है. इस मीठे तत्व को रक्त कोशिकाओं के अंदर लाने के लिए एक कैरियर होता है. उस कैरियर का नाम है इन्सुलिन. हमारे पेट में एक छोटी सी ग्रंथि होती है जिसे पैंक्रियास कहते हैं वहां ये उत्पन्न होता है. आपने जो कुछ भी खाया, उसमें सबसे आसानी से मिलने वाला जो ऊर्जा तत्व है, उसको इन्सुलिन अपने ऊपर बिठाकर ब्लड सेल के दरवाजे पर लेकर आता है और इंसुलिन दरवाजे की घंटी बजाता है. जैसे ही दरवाज़ा खुलता है तब सुगर तत्त्व इंसुलिन के साथ अंदर आ जाता है. अगर ऐसा होता है तो ये स्वस्थ व्यक्ति की निशानी है.

अगर व्यक्ति स्वस्थ है तो इन्सुलिन रक्त के अंदर कैरियर के रूप में एनर्जी पहुंचाता रहेगा. अगर किसी को डायबिटीज है तो उसका इन्सुलिन अपने ऊपर ग्लूकोज को लेकर दरवाजे तक तो आता है, लेकिन फिर घंटी बजाये बिना वापस चला जाता है. ऐसी स्थिति में इन्सुलिन के ऊपर बैठा हुआ ग्लूकोज या सुगर शरीर के ब्लड में घूमता रहता है. तो जब भी ऐसे रक्त का परिक्षण करते है तो उसमे सूगर निकल आता है. ऐसी स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है.

जब इन्सुलिन अपना काम नहीं कर रहा होता है या फिर जब तक शरीर में इन्सुलिन कम बन रहा होता है तब तक डायबिटीज का ठीक होना आसान होता है. लेकिन जब इन्सुलिन बनना ही बंद हो जाता है तब डायबिटीज का ठीक होना मुश्किल हो जाता है.

ऐसी स्थिति तब आती है जब किसीके शरीर में कोलेस्ट्रॉल प्रमाण ज्यादा होता है. औषधि का उद्देश्य यह होता है कि इन्सुलिन के कम काम करने की वजह से इन्सुलिन में जो आलसीपन आया है वो कम हो जाये या फिर इन्सुलिन ज्यादा बने. अगर कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया है तो कोलेस्ट्रॉल कम करने पर इन्सुलिन अपना काम करना शुरू करेगा.

उन्होंने आगे बताया कि अगर डायबिटीज ठीक करना है तो सबसे पहले कोलेस्ट्रॉल कम करना पड़ेगा. ऐसा खाना कभी न खाए जिस से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता हो. क्योंकि कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से डायबिटीज होती है.

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