Wednesday, November 23, 2022
दुनिया

अब मुस्लिम वुमन स्विमर्स बुर्कीनी पहनकर ले सकती है रेस में हिस्सा,मिली इजाजत:इंग्लैंड

SI News Today

इंग्लैंड में मुस्लिम वुमन स्विमर्स को बुर्कीनी (लूज फुल बॉडी आउटफिट) पहनकर तैराकी कॉम्पिटीशंस में हिस्सा लेने की इजाजत मिल गई है। मुस्लिम वुमंस स्पोर्ट फाउंडेशन की अपील पर एमेच्योर स्विमिंग एसोसिएशन (ASA) ने स्विमसूट रेग्युलेशंस में ढील दे दी है। हालांकि अब भी बुर्कीनी जैसा फुल बॉडी सूट ओलिंपियंस को पहनने पर पाबंदी है। जबकि इससे बॉडी को शेप में रखने में मदद मिलती है और परफॉर्मेंस में भी सुधार होता है।

न्यूज एजेंसी के मुताबिक, द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में कहा गया है कि नई गाइडलाइन पर इंग्लैंड में सिर्फ शौकिया तौर पर हाेने वाले कॉम्पिटीशंस में ही अमल होगा। लेकिन अगर कॉम्पिटीशन रेफरी को लगता है कि सूट से परफॉर्मेंस में मदद मिल रही है तो वह कॉम्पिटीटर को सूट पहनने की इजाजत नहीं भी दे सकता है।
– ASA स्पोर्ट गवर्निंग बॉडी ने फोटोग्राफ पब्लिश करके यह सलाह दी है कि लूज फिटिंग आउटफिट्स पहनने की मुस्लिम महिलाओं को ही इजाजत है।
एथलीट की इच्छा जानने के बाद रेफरी न करे सवाल
– गाइडलाइन में कहा गया है कि अगर स्विमर ने एक बार कॉम्पिटीशन रेफरी को सूट पहनने की अपनी इच्छा के बारे में बता दिया है तो फिर इसकी कोई जरूरत नहीं है कि रेफरी आगे स्विमर से कोई सवाल करे।
– “ASA स्विमिंग मैनेजमेंट ग्रुप यह नहीं चाहता है कि एथलीट से यह पूछा जाए कि उसने आखिर सूट पहनने की इच्छा क्यों जताई है।”
ASA का क्या कहना है?
– ASA स्पोर्ट गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन क्रिस बोस्टॉक ने इस कदम को इंग्लैंड में कॉम्पिटीटिव स्विमिंग के लिए बेहद पॉजिटिव करार दिया है। उन्होंने कहा है कि उम्मीद है कि इससे ज्यादा लोग कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेने के लिए एनकरेज होंगे।
– क्रिस का कहना है, “हम चाहते हैं कि हर कोई अपनी क्षमता के मुताबिक परफॉर्मेंस दे। नेशनल स्विमिंग कॉम्पिटिशन में अपने क्लब को रिप्रेजेंट करना बहुत खास है। रूल्स में बदलाव करने से हमें उम्मीद है कि स्विमर्स की नई जेनरेशन इससे एनकरेज होगी।”
कट्टरपंथियों को है एतराज
– खेलों खासतौर पर तैराकी में मुस्लिम महिलाओं की ड्रेस क्या हो, यह टॉपिक दुनियाभर में चर्चा में है। मुस्लिम कट्टरपंथी स्विम सूट में महिलाओं के तैरने पर एतराज जताते हैं। फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों में बुर्किनी पहनने पर यह कहकर रोक लगाई गई है कि इससे डिस्क्रिमिनेशन पैदा होता है।
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