Saturday, May 18, 2024
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बांग्लादेश के साथ संबंधों को भारत काफी महत्व देता है: सुमित्रा महाजन

SI News Today

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने आज बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से मुलाकात की और कहा कि भारत इस पड़ोसी मुल्क के साथ अपने संबंधों को काफी महत्व देता है तथा एक मजबूत, स्थिर एवं समृद्ध पड़ोसी को अपने सर्वश्रेष्ठ हित में मानता है। महाजन यहां अंतर संसदीय संघ (आईपीयू) की 136 वीं बैठक में भाग ले रहे भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत दोस्ती, विश्वास और लोगों के आपसी फायदे के लिए समझ तथा समूचे क्षेत्र की सामूहिक समृद्धि के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के आर्थिक विकास में एक साझेदार के तौर पर भी पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

इसके अलावा भारत आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की बांग्लादेश की नीति का भी समर्थन करता है। भारत चरमपंथ और आतंकवाद की ताकतों के खिलाफ इसकी लड़ाई में उसके साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री हसीना ने आशा जताई कि बांग्लादेश का भारत से करीबी और ऐतिहासिक संपर्क आने वाले वाले समय में द्विपक्षीय संबंध को दिशानिर्देशित करना जारी रखेगा। इससे पहले, लोकसभा अध्यक्ष ने आईपीयू की 136 वीं बैठक के विषय ह्यअसमानताओं को दूर करना: गरिमा प्रदान करना और सभी की भलाई पर चर्चा में प्रतिनिधियों को संबोधित किया।

इस मौके पर महाजन ने इस बात पर जोर दिया कि कई मौजूदा असमानताओं का वैश्विक संबंध है और सतत वैश्विक कोशिशों से ही हल संभव है। उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय असमानता का हल प्रभावी ढंग से और सक्षमता से कर सकता है। समाज के फायदे के लिए व्यक्ति के बढ़ने और समूचे ब्रह्मांड को शामिल करने के भारतीय दर्शन का जिक्र करते हुए महाजन ने कहा कि मानव गरिमा सिर्फ संवैधानिक माध्यमों से सुनिश्चित नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि इसे संस्कार के मूल तत्व में अंतर्निहित होना होगा जो समाज की मूल्य प्रणाली है।

महाजन ने कहा कि पारंपरिक भारतीय विचार आत्मा और परमात्मा के एक होने के विचार को जाहिर करता है। लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात का जिक्र किया कि लोगों के जोखिमग्रस्त समूहों के खिलाफ भेदभाव खत्म करने के लिए समय समय पर कई कानून लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने वंचित तबकों के अधिकारियों के कल्याण और संरक्षण के लिए कई संस्थान स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत द्वारा मंजूर की गई महत्वाकांक्षी 2030 सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) गरीबी, असमानता और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसी मुख्य चुनौतियों का हल कर न्यायसंगत विकास के लिए कोशिशों में अंतराल को पाटने में और मदद करेगा।

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