Friday, June 21, 2024
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आखिर हम इसी क्यों दिन को मनाते हैं विश्व पर्यटन दिवस

SI News Today

After all, why do we celebrate the day of World Tourism Day

  

यात्रा, सफर, पर्यटन, ट्रेवलिंग, ट्रिप, टूर शब्द चाहे जो ले लीजिए लेकिन अनुभव के स्तर पर दिमाग में जो अहसास आते हैं वह है हरी-भरी वादियां, छलछल कलकल करती नदियां, झरझर झरते झरने, साफ खूला आकाश, ऊंची-ऊंची पहाड़ियां, पंछियों का कलरव, मुस्कुराते फूल ताजातरीन खुशियां और रोमांच. अगर आपने पहले इस तरह की ट्रिप्स ली हैं तो सोने पे सुहागा है क्योंकि तब तो आपको टूरिज्म की महत्ता पल भर में समझ आ जाएंगी. पर अगर अब तक अपनी पसंदीदा जगह पर नहीं जा सके हैं तो यह जान लीजिए कि आपके लिए यह यात्रा एक थैरेपी की तरह काम करेगी.

प्रतिवर्ष 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1980 से विश्व में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विश्व पर्यटन दिवस आयोजित करने की शुरुआत 27 सितंबर को ही की थी, तब से लेकर आज तक निरंतर विश्व पर्यटन दिवस सभी विश्व के संगठन के देश मनाते चले आ रहे हैं. विश्व पर्यटन दिवस 27 सितंबर केे दिन इसलिए मनया जाता है क्योंकि इसी दिन 1970 में विश्व पर्यटन संगठन का संविधान स्वीकार किया गया था.

भारत में घूमने केे लिए अनेकों एेेतिहासिक इमारतें, मंदिर आदि हैं भारत ने पर्यटकों का ध्‍यान अपनी ओर आकर्षित करने के लिए भारत सरकार द्वारा “अतुल्‍य भारत” योजना की भी शुरूआत की है,  यह योजना काफी सफल भी हुई थी. भारत में प्रत्‍येक वर्ष लाखों की संख्‍या में पर्यटक आते हैंं इन्‍हीं पर्यटकों काेे ओर आकर्षित करने के लिए प्रत्‍येक वर्ष विश्‍व पर्यटन दिवस की एक थीम रखी जाती है.

जहाँ पिछले वर्ष विश्व पर्यटन का थीम ‘सस्टेनेबल टूरिज्म ए टूल फॉर डेवलेपमेंट’ थीं उसी तरह इस साल इसका थीम टूरिज्म एंड द डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन रखा गया है. इस साल वर्ल्ड टूरिज्म डे पर तकनीक का पर्यटन में महत्व जानने के अलावा, इस क्षेत्र में नई खोज करने के साथ साथ इस क्षेत्र का भविष्य भी तैयार करने जैसे कार्य किए जाएंगे. तकनीक (अधिक डेटा संकलन के रूप में, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के रूप में और डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में) कैसे इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयां दे रहे हैं यह इस साल के वर्ल्ड टूरिज्म डे पर जाना जाएगा.

इसी क्रम में Jamia Millia Islamia यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम का आयोजन हुआ. जब वहाँ के स्टूडेंट मोहम्मद कमाल से हमारे द्वारा संपर्क किया गया तो उन्होंने हमें बताया कि दुनिया की आबो हवा में किस तरह ज़हर घुल रहा है और राजनितिक उपेक्षाओं के कारण कैसे देश पीछे जा रहा है.

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